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विदेशों में फिर से बढ़ रहा है कोरोना का प्रकोप, सतर्क और सुरक्षित रहें भारतवासी- डा. प्रशांत

गाजीपुर। डा. प्रशांत ने बताया कि मई 2025 में सिंगापुर और हांगकांग में कोविड-19 मामलों में फिर से वृद्धि देखी जा रही है। हालांकि यह लहर पिछली लहरों की तुलना में कम गंभीर प्रतीत हो रही है, लेकिन बच्चों पर इसका प्रभाव विशेष रूप से चिंता का विषय बना हुआ है। भारत में स्थिति अभी सामान्य है। 2025 में सिंगापुर और हांगकांग में कोरोना वायरस (COVID-19) के मामलों में फिर से बढ़ोतरी देखी जा रही है। अप्रैल 2025 से शुरू हुई यह नई लहर भले ही पहले जितनी भयावह नहीं है, लेकिन इसका प्रभाव विशेष रूप से बच्चों पर अधिक पड़ रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह नया वेरिएंट (जैसे KP.2 या अन्य उप-प्रकार) बच्चों की प्रतिरक्षा प्रणाली को आसानी से प्रभावित कर रहा है।

संक्रमण की स्थिति और गंभीरता

हांगकांग में कोविड-19 संक्रमण दर मार्च के मध्य में 1.7% से बढ़कर मई के पहले सप्ताह में 11.4% हो गई है, जो पिछले वर्ष अगस्त के शिखर से भी अधिक है। सप्ताहांत 3 मई तक, शहर में 31 गंभीर मामलों की रिपोर्ट की गई, जो पिछले 12 महीनों का उच्चतम आंकड़ा है।

सिंगापुर में भी इसी अवधि में संक्रमण में 28% की वृद्धि हुई है, जहां एक सप्ताह में लगभग 14,200 नए मामले सामने आए हैं। अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या में भी लगभग 30% की वृद्धि देखी गई है।

बच्चों पर प्रभाव

हांगकांग में बच्चों में कोविड-19 के गंभीर मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। एक प्रमुख बाल रोग विशेषज्ञ के अनुसार, “पहले हमारे वार्ड में कोई कोविड-19 मरीज नहीं था, लेकिन अब पूरा वार्ड बच्चों से भरा हुआ है।” इनमें से अधिकांश बच्चों को उच्च बुखार (लगभग 39°C) के साथ दो से तीन दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा। सिंगापुर में भी बच्चों में संक्रमण के मामलों में वृद्धि देखी गई है, हालांकि अधिकांश मामले हल्के लक्षणों वाले हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों में गंभीर लक्षणों की संभावना कम होती है, लेकिन सतर्कता आवश्यक है।

कितनी गंभीर है स्थिति?

लक्षण: बच्चों में बुखार, खांसी, गले में खराश और थकान के साथ-साथ पेट संबंधी समस्याएं (दस्त, उल्टी) देखी जा रही हैं।

-हॉस्पिटलाइजेशन: पहले की तुलना में कम गंभीर है, लेकिन छोटे बच्चों (खासकर 5 साल से कम उम्र के) और कमजोर इम्युनिटी वाले बच्चों को अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता पड़ सकती है।

-वयस्कों पर प्रभाव: इस स्ट्रेन से वयस्कों में गंभीरता कम है, लेकिन बुजुर्ग या पहले से बीमार लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।

बचाव के उपाय

  1. टीकाकरण: हांगकांग सरकार ने JN.1 उपप्रकार के खिलाफ mRNA टीकों की पेशकश शुरू की है, जो सभी पात्र आयु समूहों के लिए उपलब्ध हैं।
  2. स्वच्छता: नियमित रूप से हाथ धोना और सैनिटाइज़र का उपयोग करना संक्रमण से बचाव में सहायक है।
  3. मास्क का उपयोग: भीड़भाड़ वाले स्थानों पर मास्क पहनना संक्रमण के प्रसार को रोकने में मदद करता है।
  4. सामाजिक दूरी: भीड़भाड़ वाले स्थानों से बचना और सामाजिक दूरी बनाए रखना आवश्यक है। घर और सार्वजनिक स्थानों पर हवा का प्रवाह बनाए रखें।
  5. स्वास्थ्य निगरानी: बुखार, खांसी या अन्य लक्षणों के प्रकट होने पर तुरंत चिकित्सा सलाह लेना चाहिए।

बच्चों में बुखार, खांसी, गले में खराश और थकान के साथ-साथ पेट संबंधी समस्याएं (दस्त, उल्टी) देखी जा रही हैं।  हॉस्पिटलाइजेशन पहले की तुलना में कम गंभीर है, लेकिन छोटे बच्चों (खासकर 5 साल से कम उम्र के) और कमजोर इम्युनिटी वाले बच्चों को अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता पड़ सकती है।  वयस्कों पर प्रभाव इस स्ट्रेन से वयस्कों में गंभीरता कम है, लेकिन बुजुर्ग या पहले से बीमार लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।  इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए विटामिन-सी, जिंक और प्रोबायोटिक्स युक्त आहार दें। हालांकि यह नया प्रकोप पहले जितना खतरनाक नहीं है, लेकिन सावधानी बरतना जरूरी है। वर्तमान में भारत में स्थिति स्थिर है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय यात्रा और वैश्विक संक्रमण दर को देखते हुए सतर्क रहना आवश्यक है। विशेष रूप से बच्चों की सुरक्षा के लिए उपयुक्त सावधानियों का पालन करना महत्वपूर्ण है। स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक की अध्यक्षता में सोमवार को राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र, आपात चिकित्सा राहत विभाग, आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद और केंद्र सरकार के अस्पतालों के विशेषज्ञों की समीक्षा बैठक हुई। अस्पतालों को इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारियों और श्वसन संक्रमण के गंभीर मामलों की निगरानी करने के लिए कहा गया है।सरकारें भी टेस्टिंग और वैक्सीन उपलब्धता बढ़ा रही हैं। बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सभी को नियमों का पालन करना चाहिए।

 

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