गाजीपुर। पितृ विसर्जन (सर्व पितृ अमावस्या) के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पक्का बलुआ घाट गंगा नदी स्नान के बाद तर्पण और पिंडदान करके अपने पूर्वजों को विदाई दी। बताया जा रहा है कि सामूहिक तर्पण और पिंडदान जमानिया कस्बा बाजार स्थित पक्का बलुआ घाट गंगा नदी में शनिवार को सैकड़ों श्रद्धालुओं ने कर्मकांड कर पितरों की आत्मा की शांति की कामना किया। इस दिन जौ के आटे, चावल, दूध, दही, शहद, घी और काले तिल से पिंड का निर्माण कर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पूजन किया जाता है। ब्राह्मण पुजारी उद्धव पांडे ने बताया कि सर्व पितृ अमावस्या पितृ पक्ष का अंतिम दिन है। इस दिन पिंडदान करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।और पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। उन्होंने बताया कि पितृ विसर्जन (सर्व पितृ अमावस्या) के अवसर पर गंगा नदी में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने एकत्र होकर तर्पण, पिंडदान और कर्मकांड कर पितरों को विदाई दी। पांडे ने बताया कि कर्मकांड एवं विधि शनिवार की सुबह स्नान के बाद दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जल, काले तिल, जौ, कुश, चावल, फूल और चंदन से पिंडदान व तर्पण किया गया। उन्होंने कहा कि पिंडदान के बाद ब्राह्मणों को भोजन, अन्न, वस्त्र और अन्य जरूरी वस्तुओं का दान किया जाता है। बता दे की शनिवार को अंतिम पितृ विसर्जन (सर्वपितृ अमावस्या) के दिन पक्का बलुआ घाट स्थित गंगा नदी में बड़ी संख्या में लोग एकत्र होकर अपने पूर्वजों का पिंडदान, तर्पण और पूजन करने का सिलसिला जारी रहा। इस दौरान ब्राह्मण भोज या जरूरतमंदों को दान करने से पितरों को तृप्ति मिलती है। और पितृदोष से मुक्ति होती है।
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