गाजीपुर। सूफी शेख शाह फखरुद्दीन अहमद चिश्ती का 43 वर्षीय दो दिवस उर्स मनाया जारहा है . इस अवसर पर देश के कोने कोने से लेखक, साहित्यकार एवम चिंतक ” आईममा अहले बैत की अजमत तथा फजीलत ” नामक सेमिनार में सम्मलित हुए. इस अवसर पर मशहूर लेखक तथा इतिहासकार उबैदुर्रहमान ने सैयद इमाम जाफर सादिक के जीवन दर्शन और उनके किए गए कार्यों पर बोलते हुए कहा कि जिस प्रकार मुस्लिम चिंतकों ने अपनी आने वाली नस्लों के लिए उच्च्य स्तरीय शिक्षा नीति और इस्लामिक दर्शन पेश किया है, हमे अपने जीवन में अनुसरण करना होगा क्योंकि जिस रफ्तार से विज्ञान और टेक्नालॉजी आगे बढ़ रही है , हमे भी इस ओर सोचना होगा . हमारे इस्लामिक चिंतकों में अग्रणीय सैयद इमाम जाफर सादिक ने केमिस्ट्री, फिजिक्स , मैथ, जीव विज्ञान , दर्शन शास्त्र पर बहुमूल्य पुस्तके एवं शोध पत्र लिखे है , उनके आधार पर बच्चो और बच्चियों में लगन पैदा होनी चाहिए कि हमे भी अच्छी से अच्छी हेतु जागरूक होना चाहिए! सेमिनार में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के प्रोफेसर अब्दुस सलाम जिलानी , मौलाना अजहर फहीम अहमद सकलैनी अजहरी बदायूं,बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग के डाक्टर अफजल मिस्बाही साहब , मौलाना शाह फरीद अख्तर कादरी साहब , प्रिंसिपल दारुल उलूम कादरिया गाजीपुर, मानिकपुर प्रतापगढ़ के जामिया हंफिया रिजविया से मुफ्ती शाहनवाज अजहरी , अयोध्या से मुफ्ती जियाउल हक सकाफी, ۔इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के डाक्टर तालिब इकराम, मदरसा दारूल उलूम कादरिया गाजीपुर के उस्ताद मौलाना अरशद कादरी ने अपने अपने शोध पत्र पढ़े। बड़ी संख्या में जनपद के सम्मानित लोग भी थे तथा अंत में सेमिनार के आयोजक और खानकाह गौसिया चिश्तिया के आयोजक निवासी श्री हाजी शाह जफर इकबाल चिश्ती साहब ने सेमिनार में सभी हिस्सा लेने वाले विद्वानों को फूल गुलदस्ता , अंगवस्त्रम तथा सम्मान से सम्मानित किया और अपने पूर्वजों के विषय पर बोलते हुए कहा कि यह दरगाह ऐसी है जिसे हमारे पूर्वज मखदूम शाह अबुल गौस दीवान ने 350 वर्ष पूर्व ने इस्लामिक धर्म दर्शन की सेवा हेतु बुनियाद रखी थी. यह सिलसिला आज तक चला आराह है . आज भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु आकार अपनी अपनी मन्नतें पूरी करते है.
