गाजीपुर। जीवन में तनाव सब जगह है तनाव आपको सर्वोत्तम करने का एक अवसर प्रदान करता है। अपने को जीवन के प्रत्येक परिस्थिति के लिए तैयार रखें। सफलता-असफलता जीवन का एक क्षण है। सबका वक्त आता है । दोनों को अपने सिर पर न चढ़ने दे। किसी की किसी से कोई तुलना नहीं है । अपने मनोभावों और मन को समझें। यदि आप अपनी किसी मानसिक परेशानी का समाधान नहीं कर पा रहे हैं तो किसी प्रोफेशनल व्यक्ति से सहायता अवश्य लें। तन के घाव दिखते हैं, लेकिन मन के नहीं! अपने मन के घाव को छिपाए नहीं, बल्कि किसी करीबी से साझा अवश्य करें। उपरोक्त बातें मेडिकल कॉलेज, गाजीपुर के मनोचिकित्सक डॉ प्रदीप यादव ने विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय की छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा। इससे पूर्व आपने छात्राओं द्वारा बनाए गए चार्ट एवं पोस्टर का अवलोकन किया तथा उनसे संवाद करते हुए उनके इस रचनात्मक जागरूकता कार्यक्रम की सराहना किया। इस अवसर पर संजना पांडे, आनंदी गुप्ता, संस्कृति उपाध्याय, गुनगुन जायसवाल आदि ने पैनिक अटैक का सामना करने, गुस्सा शांत करने, नशा विमुक्ति के तरीकों, मनोवैज्ञानिक एवं मनोचिकित्सक में अंतर तथा मानसिक समस्या को छिपाने वाले मरीजों की कैसे सहायता की जाए आदि विषयों पर सवाल कर इसका समाधान प्राप्त किया। इससे पूर्व विषय प्रवर्तन करते हुए मनोविज्ञान विभाग प्रभारी डॉ शिवकुमार ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य हमारे जीवन का महत्वपूर्ण पक्ष है। इसके संबंध में अनेक भ्रांतियां एवं चुनौतिया हैं। इस दिवस के बहाने पूरी दुनिया में मानसिक स्वास्थ्य के विविध पक्षों पर चर्चा की जाती है। इस वर्ष मानसिक स्वास्थ्य को लोगों के अनुभव से समझना तथा संस्थाओं से अधिक समुदाय एवं परिवार के माध्यम से सहयोग प्रदान करना विश्व स्वास्थ्य संगठन का लक्ष्य है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य डॉ शंभू शरण प्रसाद ने मुख्य वक्ता डॉ प्रदीप यादव का पुष्प गुच्छ भेंट कर स्वागत किया तथा उन्हें अंगवस्त्रम और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। आपने छात्राओं की मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विविध आयामों को रंग, चित्र एवं विचार के माध्यम से अभिव्यक्ति की सराहना किया। आपके अनुसार शरीर और मन आपस में जुड़े हैं इसलिए संवेदनशील बने और अपनी क्षमताओं एवं कमजोरी को पहचाने तथा आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञों की सहायता लेने से संकोच न करें। मनोविज्ञान विभाग द्वारा आयोजित इस जागरूकता कार्यक्रम के तहत वर्ष 2026 की थीम “जीवन के अनुभवो को सुना जाए : सच्ची आवाजे, सच्चे बदलाव”! विषय पर आयोजित चार्ट, पोस्टर विचार अभिव्यक्ति प्रतियोगिता एवं विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन किया गया। 30 से अधिक छात्राओं ने मानसिक स्वास्थ्य के विविध सकारात्मक एवं नकारात्मक पक्षों को आकर्षक रंगो चित्रों और मनोहारी माध्यम से प्रस्तुत किया। जिसका मूल्यांकन डॉ सारिका सिंह, डॉ इखलाक खान और डॉ ओम शिवानी ने किया। पोस्टर प्रतियोगिता में पलक चौरसिया प्रथम, खुशबू चौहान द्वितीय एवं ऋतु राज तृतीय स्थान पर एवं अलीशा परवीन तथा अलीशा खान का प्रयास प्रशंसित रहा। जबकि चार्ट प्रतियोगिता में मुस्कान कुमारी प्रथम, आनंदी गुप्ता द्वितीय एवं शाइस्ता तृतीय स्थान पर एवं हुमैंरा फातिमा तथा नेहा वर्मा का प्रयास प्रशंसित रहा। इस अवसर पर मनोविज्ञान की छात्राओं ने भी अपने ज्ञान एवं अनुभवों को विचारों के माध्यम से बहुत ही प्रभावी तरीके से व्यक्त कर प्रशंसा प्राप्त किया। जिसका निर्णय डॉ निरंजन कुमार यादव, डॉ नेहा कुमारी, डॉ रामनाथ केसरवानी द्वारा किया गया। इसके तहत संजना पांडे प्रथम, जोया सुल्तान द्वितीय, आनंदी गुप्ता तृतीय स्थान पर रहीं। कार्यक्रम का संचालन एवं आभार ज्ञापन मनोविज्ञान परिषद के प्रभारी डॉ शिवकुमार द्वारा किया गया। कार्यक्रम के सफल संयोजन में मनोविज्ञान परिषद की छात्राओं माही प्रजापति, इल्मा सिद्दीकी, निशा यादव, मुस्कान, खुशी गुप्ता, आस्था कश्यप, खुशबू यादव आदि की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस दौरान डॉ राजेश कुमार यादव, डॉ संगीता मौर्य, डॉ पीयूष सिंह आदि प्राध्यापक गण एवं मनोविज्ञान विभाग तथा महाविद्यालय की सुधी छात्राएं उपस्थित रही।
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