गाजीपुर। स्वामी विवेकानंद के ऐतिहासिक शिकागो संबोधन की स्मृति में ‘राष्ट्रीय जागरण और स्वामी विवेकानंद’ विषयक युवा संवाद एवं ‘कजरी उत्सव’ का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। “भारत वैभव” एकवर्षीय उत्सव श्रृंखला की कड़ी में काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पं. ओंकारनाथ ठाकुर प्रेक्षागृह में आयोजित हुए इस कार्यक्रम में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह की विशेष उपस्थिति रही। यह कार्यक्रम छात्र अधिष्ठाता कार्यालय, संगीत एवं मंच कला संकाय तथा ‘भारत वैभव’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ। इस कार्यक्रम में स्वामी विवेकानंद के चिंतन, भारतीय पुनर्जागरण और राष्ट्र निर्माण में युवा शक्ति की भूमिका पर सार्थक विमर्श के साथ – साथ कजरी उत्सव के रूप में पूर्वांचल की समृद्ध लोक-सांस्कृतिक परंपरा की मनोहारी प्रस्तुतियां हुईं।काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पुरातन छात्र रहे बतौर मुख्य अतिथि हरिवंश नारायण सिंह ने कहा कि “जिस समय भारत दीनता, पराधीनता और निराशा के कठिन दौर से गुजर रहा था, उस समय स्वामी विवेकानंद ने अपने विचारों से राष्ट्रीय आत्मविश्वास और नवजागरण की चेतना को स्वर दिया। उनके चिंतन ने निराशा के अंधकार में आशा का प्रकाश जगाया और भारतीय समाज को अपनी सामर्थ्य का बोध कराया। उन्होंने कहा कि आज भारत तकनीक, अनुसंधान और ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में निरंतर नई ऊंचाइयां प्राप्त कर रहा है। ऐसे समय में युवाओं को राष्ट्र निर्माण की इस यात्रा में अपनी ऊर्जा, प्रतिभा और सकारात्मक दृष्टि के साथ सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए।उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद की उपलब्धियों को केवल उनके प्रसिद्ध भाषणों और व्यक्तित्व के संदर्भ में देखना पर्याप्त नहीं है। उनके पीछे निहित तप, साधना, संघर्ष और त्याग को समझना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि एक सशक्त और संवेदनशील समाज के निर्माण के लिए युवाओं में विवेकानंद जैसे संकल्प, आत्मविश्वास और सकारात्मक दृष्टिकोण आज समय की माँग है।”इससे पूर्व उन्होंने विश्वविद्यालय के सरदार वल्लभभाई पटेल छात्रावास परिसर में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का अनावरण किया तथा विद्यार्थियों की सुविधा के लिए नवनिर्मित साइबर लाइब्रेरी का उद्घाटन किया। उन्होंने इसे विद्यार्थियों की अकादमिक आवश्यकताओं की पूर्ति तथा उनके बौद्धिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। इस अवसर पर हरिवंश नारायण सिंह को कुलसचिव के द्वारा ‘बीएचयू डिस्टिंग्विश्ड एलुमनी अवार्ड-2020’ भी प्रदान किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता काशी हिंदू विश्वविद्यालय के वरिष्ठ आचार्य एवं प्रख्यात आलोचक प्रो. अवधेश प्रधान ने स्वामी विवेकानंद के शिकागो संबोधन तथा उनके सर्वधर्म समन्वय के व्यापक मानवीय संदेश को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि विवेकानंद का चिंतन संकीर्ण धार्मिक आग्रहों से परे मानवता और सेवा को केंद्र में रखता है। उन्होंने बिना किसी व्यक्ति की धार्मिक पहचान पूछे निष्काम सेवा को महत्व दिया। प्रो. प्रधान ने कहा कि स्वामी विवेकानंद धर्म और अधर्म के अंतर को गहराई से समझते थे; यही कारण है कि उनका चिंतन अपने समय से आगे का और आज भी उतना ही आधुनिक एवं प्रासंगिक है। उन्होंने युवाओं से स्वामी विवेकानंद के विचारों को केवल उद्धरणों के माध्यम से नहीं, बल्कि उनके मूल ग्रंथों और चिंतन की गहराई में जाकर समझने का आह्वान किया। उन्होंने विवेकानंद के संदेश—‘उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए’—को जीवन के संकल्प और कर्म का आधार बनाने की प्रेरणा दी। विश्वविद्यालय के कुलसचिव राजन श्रीवास्तव ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने जिस कालखंड में राष्ट्रीय नवजागरण की चेतना को प्रखर किया, वह भारत के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण समय था। उन्होंने कहा कि विवेकानंद का चिंतन केवल अतीत के गौरव का स्मरण नहीं कराता, बल्कि शक्ति, चरित्र, सेवा और राष्ट्रनिर्माण के लिए वर्तमान को जागृत करता है। युवाओं को वैचारिक रूप से समृद्ध करने वाले ऐसे आयोजन उनके भीतर आत्मबोध, सामाजिक संवेदनशीलता और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व की भावना को सुदृढ़ करने का माध्यम बन सकते हैं। छात्र अधिष्ठाता प्रो. रंजन कुमार सिंह ने कहा कि विश्व धर्म संसद, शिकागो में स्वामी विवेकानंद के ऐतिहासिक संबोधन की स्मृति में आयोजित यह कार्यक्रम नई पीढ़ी को उनके विचारों और जीवन-दृष्टि से जोड़ने की सार्थक पहल है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे संवाद युवाओं को आत्मविश्वास, संकल्प और रचनात्मक राष्ट्र-निर्माण की दिशा में प्रेरित करेंगे।कार्यक्रम के दूसरे चरण में संगीत एवं मंच कला संकाय की प्रमुख प्रो. संगीता पंडित के निर्देशन में ‘कजरी उत्सव’ प्रस्तुत किया गया। संकाय के प्राध्यापकों के साथ संगत करते हुए कलाकारों और विद्यार्थियों ने कजरी की पारंपरिक एवं मनोहारी प्रस्तुतियों से प्रेक्षागृह को सुर, लय और लोक-संवेदना से भर दिया। कजरी की इन प्रस्तुतियों में पूर्वांचल की माटी की गंध, लोकजीवन की सहज अनुभूति और उसकी जीवंत सांस्कृतिक विरासत की अनुगूंज ने उपस्थित श्रोताओं की हृदयतंत्रियों को रोमांचित कर दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रो. ज्ञानेश चंद्र पांडेय द्वारा राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की प्रस्तुति से हुआ। इस अवसर पर थाईलैंड व म्यांमार से आए छात्रों ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन पत्रकारिता विभाग के प्राध्यापक व आयोजन के मुख्य संयोजक डॉ. धीरेन्द्र कुमार राय ने किया। उन्होंने बताया कि ‘भारत वैभव’ सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के आलोक में एकवर्षीय राष्ट्रीय उत्सव के रूप में भारत की विराट सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्रीय एकात्मता और गौरवशाली परंपरा को केंद्र में रखकर विविध आयोजन कर रहा है। वर्षभर चल रही इस श्रृंखला के माध्यम से भारत के अतीत के गौरव, वर्तमान की उपलब्धियों और भविष्य के संकल्प को एक सूत्र में पिरोने का प्रयास किया जा रहा है। कला, साहित्य, संगीत, संवाद और विमर्श के विविध माध्यमों से ‘भारत वैभव’ नई पीढ़ी को भारत के व्यापक बोध और उसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने की दिशा में निरंतर सक्रिय है। जबकि पाली के प्राध्यापक व सरदार वल्लभभाईपटेल छात्रावास के संरक्षक डॉ शैलेंद्र सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया।इस अवसर विभिन्न विभागों के प्राध्यापक समेत विश्वविद्यालय के प्रशासनिक अधिकारी, शोधार्थी, छात्र एवं वाराणसी के प्रबुद्ध जनों ने भी बड़ी उत्साह कार्यक्रम में सहभागिता की।
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