गाजीपुर। बतारीख 30 मई 2023 बरोज़ मंगल दारुल उलूम का़दरिया दायरा शाह अहमद मोहल्ला टेढ़ी बाजार शहर गाजीपुर में हज के सफ़र पर जाने वाले खुशनसीब जा़यरीन के लिए इस्तेक़बालिया प्रोग्राम मुनकि़द किया गया, इस साल हज्जे बैतुल्लाह के लिए जि़ला गाजीपुर से 285 के क़रीब हाजी हज का अहम फ़रीज़ा अदा करने के लिए करने मक्का मुकर्रमा पहुंच रहे हैं, जबकि गा़जी़पुर शहर से क़रीब 40 खुशनसीब लोग खाना ए काबा और मदीना मुनव्वरा की जि़यारत करेंगे, इस्तेक़बालिया प्रोग्राम हज़रत हकीम काज़ी शाह ग़ुलाम मोहम्मद नूर उल का़दरी साहब सज्जादा नशीन खा़नका़ह दाएरा शाह अहमद गा़जीपुर की सरपरस्ती और दारुल उलूम कादरिया के प्रिंसिपल हज़रत मौलाना फ़रीद अख़्तर का़दरी की सदारत में हुआ, प्रोग्राम में शहर के सभी हुज्जाजे केराम तशरीफ लाए, मदरसा की तरफ़ से सभी हाजियों की गुलपोशी की गई, साथ ही उन्हें इस सफ़र पर जाने के लिए नम आंखों से मुबारकबाद पेश किया गया, मौलाना फरीद अख्तर कादरी साहब ने हज के जायरीन को आसान तरीके पर हज का तरीका बताया साथ ही इस अहम जगह पर जहां जाने के लिए दिल तरसते रहते हैं और पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम के आस्ताने पर जहां अल्लाह पाक की खा़स रहमत नाजि़ल होती है उस जगह पहुंचकर मुल्क की सलामती और खुशहाली के लिए दुआएं करने के लिए कहा गया, हज आपस में भाईचारा, मोहब्बत और अमन का पैगाम देता है, जहां अल्लाह के नेक बंदों की बहुत सारी निशानियां हैं हज पर जाने वाले हाजी उन निशानीयों की जि़यारत करते हैं और अल्लाह ताला उस जगह पर अपने बंदों के ज़रिया मांगी हुई दुआअओं को कुबूल करता है और उनकी गुनाहों को माफ़ कर दिया करता है, हज के बाद इंसान गुनाहों से ऐसे पाक हो जाता है जैसे वह मां के पेट से अभी जन्म हुआ हो और उसके पास कोई गुनाह न हो, हज के इस मुबारक सफ़र पर गाजीपुर से जो हुज्जाजे केराम जा रहे हैं उनमें मदरसा कादरिया के उस्ताद हाफिज अशरफ करीम कादरी साहब जुबेर सिद्दीकी, जुबेर एडवोकेट, मोहम्मद हसीन साहब, मंसूर आलम, मोहिउद्दीन साहब, अख़लाक अहमद साहब, रियाजुद्दीन, फिरोज साहब, डॉक्टर शमीम उल हक, गुलाम मुस्तफा़, दानिश साहब, डॉक्टर फ़खरे आलम साहब, डॉक्टर साजिद उमर साहब, मुशीर सिद्दीकी, अयूब साहब के अलावा खवातीन ए इस्लाम भी उस खूबसूरत, हसीन और मुकद्दस वादी की जि़यारत के लिए सफ़र ए हज पर रवाना हो रहे हैं, इस्तेक़बालिया प्रोग्राम में शहर के जो लोग मौजूद रहे उनमें खासतौर से जनाब अबू फ़ख़र खान साहब अध्यक्ष व्यापार मंडल, अतीक अहमद राईनी, कमरुज्जमा अंसारी, सैफुद्दीन भाई, लईक अहमद, हसन फैजी, हंटर गाजीपुरी, मौलाना अरशद कादरी, मौलाना अहमद कादरी, हाजी मोहम्मद हाशिम, राजू भाई, हाजी अब्दुल रशीद, कलेक्टर भाई, दल्ली भाई, अंसार भाई वगैरह हाजि़र रहे और सभी ने हुज्जाज केराम के गलों में फूलों की माला डालकर नम आंखों से विदा किया

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