शिवकुमार
गाजीपुर। विधानसभा चुनाव 2027 नजदीक आते ही अब भाजपा के भावी प्रत्याशी मनोज सिन्हा की परिक्रमा करने लगें है। भारतीय जनता पार्टी ने जिले के लिए मनोज सिन्हा सबसे कद्दावर नेता है, गाजीपुर के बारे में काई भी निर्णय लेना हो तो हाईकमान बिना उनसे राय लिये कोई निर्णय नही लेता है। सभासद से लेकर सांसद तक, संगठन में मंडल अध्यक्ष से लेकर जिलाध्यक्ष तक की नियुक्ति भी माननीय के इशारे पर होती है। गाजीपुर का काई भी नेता राष्ट्रीय या प्रदेश स्तर के नेताओ से अपने बारे में कुछ भी कहता है तो उधर से जबाब आता है कि माननीय से आप बात कर लें, वो तैयार है तो मैं भी तैयार हूं। पूर्व मंत्री विजय मिश्रा ने अपना राजनैतिक सफर समाजवादी पार्टी से शुरू किया और पहली बार सदर विधानसभा से चुनाव लड़ें जिसमें वह विधायक निर्वाचित हुए तथा अखिलेश सरकार में उन्हे राज्यमंत्री बनाया गया। सैफई परिवार में कलह के चलते विजय मिश्रा को 2017 में सपा से टिकट नही मिला जिसके चलते वह चुनाव से बाहर हो गये, जिसके बाद वह बसपा में गयें लेकिन वहां की राजनीति उन्हे रास नही आयी और भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर लिया। 2019 के लोकसभा चुनाव में मनोज सिन्हा को जीताने के लिए हर संभव प्रयास किया। इनके मेहनत और निष्ठ को देखकर मनोज सिन्हा काफी प्रभावित हुए तभी से दोनो में काफी नजदीकिया बढ़ गयी। चुनाव हारने के बार मनोज सिन्हा को भाजपा के हाईकमान ने जम्मू काश्मीर का उपराज्यपाल बनाया। विजय मिश्रा लगातार पार्टी के लिए कार्य करते रहें, विजय मिश्रा ने मंगलवार को उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के साथ मां वैष्णो देवी का दर्शन किया और जनपद के सुख-समृद्धि के लिए आशीर्वाद मांगा। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के साथ पूर्व मंत्री विजय मिश्रा का फोटो आते ही सदर विधानसभा का सियासी पारा गरम हो गया। करीब 4 लाख मतदाताओ वाली विधानसभा में अब तक ब्राह्मण दो बार कांग्रेस से अमिताभ अनिल दूबे और सपा से विजय मिश्रा निर्वाचित हो चुके है। अब देखना है कि ब्राह्मणो को हैट्रिक लगाने लिए भाजपा हरी सिग्नल कब देती है।

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