ग़ाज़ीपुर। जनपद में लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों ने आमजन की चिंता बढ़ा दी है। इन्हीं हादसों के मद्देनज़र जिले में कुल 17 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए हैं। इनमें कासिमाबाद के बड़ोदरा चट्टी को छोड़ दें तो शेष सभी ब्लैक स्पॉट नेशनल हाईवे पर स्थित हैं। सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि इनमें से 12 ब्लैक स्पॉट केवल वाराणसी–गाज़ीपुर फोरलेन पर ही मौजूद हैं, जो इस मार्ग को जिले का सबसे जानलेवा सड़क मार्ग बना रहे हैं। चिन्हित ब्लैक स्पॉट्स में औड़िहार, जौहरगंज, नसीरपुर, पियरी, देवकली, पहाड़पुर नैसारा, रामपुर बंतरा, रेवसा कट (सहेड़ी), शेखपुर अरशदपुर और मरदह कैथवली जैसे क्षेत्र शामिल हैं, जहां आए दिन छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं हो रही हैं। आंकड़ों के अनुसार, बीते एक वर्ष में नंदगंज थाना क्षेत्र के फोरलेन ब्लैक स्पॉट्स पर करीब तीन दर्जन सड़क हादसे हुए, जिनमें लगभग दो दर्जन लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि आधा दर्जन से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। रेवसा फोरलेन कट पर एक ही दिन में हुए भीषण हादसे में 11 तीर्थयात्रियों की मौत ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया था। वहीं रामपुर बंतरा कट मार्ग को दूसरा सबसे खतरनाक स्थान माना जा रहा है, जहां आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। चिंताजनक पहलू यह है कि सभी चिन्हित ब्लैक स्पॉट अब भी जस के तस बने हुए हैं। लोक निर्माण विभाग की ओर से न तो ठोस सुरक्षा उपाय किए गए हैं और न ही कोई प्रभावी सुधार कार्य दिखाई दे रहा है। जबकि नियमों के अनुसार ब्लैक स्पॉट्स पर चेतावनी बोर्ड, स्पीड ब्रेकर, सड़क चौड़ीकरण, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सहित अन्य सुरक्षा इंतजाम अनिवार्य हैं। नववर्ष के अवसर पर परिवहन विभाग द्वारा चलाए जा रहे सड़क सुरक्षा अभियान के तहत सभी ब्लैक स्पॉट्स और अवैध कटों पर आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर अभी तक कोई ठोस और प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था नजर नहीं आ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अब बड़ा सवाल यह है कि क्या इस बार परिवहन विभाग इन जानलेवा ब्लैक स्पॉट्स पर वास्तविक सुरक्षा उपाय करेगा, या फिर यह सड़क सुरक्षा अभियान भी पूर्व की तरह केवल **कागज़ी और हवा-हवाई साबित होगा।
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