गाजीपुर। सनातनी परम्परा में कार्तिक शुल्क पक्ष के नवमी को आंवले की वृक्ष की पूजा करनें की परम्परा द्वापर युग से चली आ रही है। इस दिन अक्षय नवमी आवले के वृक्ष की पूजा अर्चना कर वृक्ष के नीचे पंगत में बैठकर खीर खाने से भगवान विष्णु व शिव अति प्रसन्न होते है। इस प्राचीन परम्परा व पौराणिक मान्यताओं पर आधारित श्रीरामलीला लंका मैदान स्थित रामजानकी मंदिर के महंत अखिलेश्वर दास ने अशोक वाटिका में स्थित आवंले के वृक्ष की संत महात्माओ व राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के विभाग सह प्रचारक दीपक द्वारा विधिवत पूजा अर्चन और दान किया गया और विशाल भण्डारे का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संत अखिलेश्वर ने बताया कि द्वापर युग में आज ही के दिन माता लक्ष्मी ने भगवान विष्णु के प्रतीक आंवला वृक्ष की पूजा कर साधु संत को आंवला वृक्ष के नीचे खीर का भोग व दान किया। इसी सनातनी परम्परा को लेकर आज भी श्रद्धालुओ अपनी मनोकामना पूर्ण करने के लिए आवंला वृक्ष की पूजा कर साधु संत को खीर पूड़ी खिलाकर कम्बल व अर्थ दान किया गया। इस अवसर पर साधू संत के साथ समाजसेवी राजेश उपाध्याय, टिन्कू, प्रेम जी, चन्द्र कुमार, विजय नरायन राय, कृपाशंकर राय सहित सैकड़ो महिलाए उपस्थित रहे।
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