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हत्‍या के मामले में कोर्ट ने चार आरोपियों को सुनाई आजीवन कारावास की सजा, लगाया अर्थदंड

गाजीपुर। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय चतुर्थ इ.सी. एक्ट दुर्गेश की अदालत ने हत्या के मामले में चार को आजीवन कारावास व अर्थदण्ड से दण्डित किया है। मामला सन् 2003 में मंसूर के खेत को लेकर हुए विवाद में गनेश राय की हत्या उनके पटटीदारो ने मिलकर कर दी, वादी अतुल राय की तहरीर पर थाना करीमुद्दीनपुर में पंजीकृत मु0अ0सं0-89/2003 ’ धारा 147/148/149/302 भादवि व 7 सी.एल.ए. एक्ट से सम्बन्धित धारा में छः अभियुक्तो के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। जिसमें रमाशंकर राय पुत्र शिवपूजन राय, रमाकान्त राय पुत्र शिवपूजन राय दत्तक पुत्र जीव सहाल राय, सुशील कुमार पुत्र उमाशंकर राय, चन्द्रशेखर राय पुत्र बाबू राय, संजय कुमार राय पुत्र रमाकान्त राय, कान्ती प्रकाश राय पुत्र शिवजनम राय ग्राम लौवाडीह को अभियुक्त बनाये गये। अपर शासकीय अधिवक्ता ई.सी.एक्ट शशिकान्त सिंह ने कुल सात गवाह परीक्षित कराये। गुण दोष के आधार पर 31 मई 2023 को न्यायालय ने अभियुक्तगण रमाशंकर राय, रमाकान्त राय, सुशील कुमार, संजय कुमार राय को धारा 302 व 149 आईपीसी में अजीवन कारावास व 50 हजार रुपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया। अर्थदण्ड न अदा करने पर एक वर्ष सश्रम का अतिरिक्त कारावास से दण्डित किया जायेगा व धारा 323 व 149 आईपीसी में एक वर्ष सश्रम कारावास व एक हजार रुपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया। अर्थदण्ड न अदा करने पर 03 माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास से दण्डित किया जायेगा व धारा 147 आईपीसी में दो वर्ष सश्रम कारावास व दस हजार रुपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया। अर्थदण्ड न अदा करने पर तीन माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास से दण्डित किया जायेगा व धारा 7सी.एल.ए. एक्ट में छः माह साधारण कारावास व पांच सौ रुपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया। अर्थदण्ड न अदा करने पर 15 दिन का अतिरिक्त साधारण कारावास से दण्डित किया जायेगा। रमाशंकर राय को धारा 148 आईपीसी में तीन वर्ष का सश्रम कारावास व बीस हजार रुपये का अर्थदण्ड से दण्डित किया गया। अर्थदण्ड न अदा करने पर तीन माह का अतिऱिक्त सश्रम कारावास से दण्डित किया जायेगा। सभी सजायें साथ साथ चलेगीं, अर्थदण्ड की धनराशि का 80 प्रतिशत मृतक के विधिक उत्तराधिकारी को प्रदान किया जायेगा। अभियुक्त कान्ती प्रकाश राय की म्त्यु हो चकी है व चन्द्रशेखर राय को दोषमुक्त कर दिया गया। अभियुक्तो के तरफ से इस घटना में क्रास केस भी किया गया था जो निराधार होने पर सभी दोषमुक्त कर दिये गये।

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