Breaking News
Home / ग़ाज़ीपुर / अगस्त क्रांति में नंदगंज के वीरों ने दिया था बड़ा बलिदान, आज भी शहीद स्तंभ व पार्क निर्माण के इंतेजार में है क्षेत्रवासी

अगस्त क्रांति में नंदगंज के वीरों ने दिया था बड़ा बलिदान, आज भी शहीद स्तंभ व पार्क निर्माण के इंतेजार में है क्षेत्रवासी

मुहम्मद खालिद

गाजीपुर। महात्मा गांधी के ‘करो या मरो’ के आह्वान के बाद 18 अगस्त 1942 को नंदगंज क्षेत्र के क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ निर्णायक संघर्ष का बिगुल फूंक दिया था। आजादी के आंदोलन में नंदगंज और आसपास के गांवों के हजारों लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ हुए संघर्ष में बड़ी संख्या में क्रांतिकारियों ने अपना बलिदान दिया। यही कारण है कि नंदगंज क्षेत्र के इन वीर सपूतों का नाम आज भी बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है। इतने बड़े ऐतिहासिक योगदान के बावजूद क्षेत्रवासियों को इस बात का मलाल है कि आज तक नंदगंज में शहीदों की स्मृति में कोई भव्य शहीद स्तम्भ या शहीद पार्क नहीं बनाया जा सका है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि आजादी के आंदोलन में नंदगंज के बलिदान की कहानी नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए एक स्थायी स्मारक का निर्माण बेहद जरूरी है। अगस्त क्रांति का ऐलान होने के बाद नंदगंज क्षेत्र के लोगों में भी अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आक्रोश भड़क उठा था। समाजसेवी बाबू भोला सिंह के नेतृत्व में नैसारा के पहलवान रामधारी यादव सहित हजारों लोग ‘भारत माता की जय’ का उद्घोष करते हुए नंदगंज थाने पर तिरंगा फहराने के लिए पहुंच गए थे। उस समय थानाध्यक्ष विद्याशंकर पांडेय थे। क्षेत्रीय इतिहास से जुड़े विवरणों के अनुसार, इसी दौरान क्रांतिकारियों का रुख नंदगंज रेलवे स्टेशन की ओर हो गया, जहां एक मालगाड़ी खड़ी थी। मैनपुर से श्याम नारायण सिंह, करंडा से बचाई सिंह और बलुआ से राम परीखा सिंह समेत विभिन्न स्थानों से क्रांतिकारियों की टोलियां भी वहां पहुंचीं। बेलासी के डोमा लोहार ने हथौड़े और छेनी की मदद से मालगाड़ी के डिब्बों के ताले तोड़ दिए। बताया जाता है कि स्टेशन से पूरब लगभग तीन किलोमीटर दूर पुलिया क्षतिग्रस्त कर दिए जाने से रेल मार्ग बाधित हो गया था। रेल मार्ग को दुरुस्त करते हुए अंग्रेजी फौज मौके पर पहुंच गई। इसके बाद क्रांतिकारियों और अंग्रेजी पुलिस के बीच गोलीबारी शुरू हो गई। क्षेत्रीय इतिहास के अनुसार अंग्रेजी फौज ने क्रांतिकारियों पर भारी गोलीबारी की, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शहीद और घायल हुए। गोलीकांड को लेकर अलग-अलग ऐतिहासिक विवरणों में शहीदों की संख्या अलग-अलग बताई जाती है। भारत छोड़ो आंदोलन की स्वर्ण जयंती के अवसर पर मुंबई दूरदर्शन के प्रसारण में इस गोलीकांड में 80 लोगों के शहीद होने की पुष्टि किए जाने का उल्लेख मिलता है। क्षेत्रवासी आज भी इस घटना को नंदगंज के स्वतंत्रता आंदोलन के सबसे महत्वपूर्ण और दर्दनाक अध्यायों में गिनते हैं। स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े समाजसेवी बाबू भोला सिंह ने शहीदों की स्मृति को जीवित रखने के उद्देश्य से शहीद स्मारक इंटर कॉलेज की नींव रखी थी। आज भी यह शिक्षण संस्थान क्षेत्र में शिक्षा का प्रकाश फैला रहा है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यह विद्यालय नंदगंज के स्वतंत्रता संग्राम और यहां के वीर शहीदों की याद से जुड़ी महत्वपूर्ण धरोहर है। इसके अलावा नंदगंज में इंदिरा बालिका उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के परिसर में एक शहीद स्तंभ भी स्थापित है। इस स्तंभ पर देवकली ब्लॉक के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नाम अंकित किए गए थे। वर्तमान में स्तंभ पर अंकित अधिकांश नाम मिट चुके हैं और केवल जालंधर सिंह का नाम ही स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। लोगों का कहना है कि शहीद स्तंभ का जीर्णोद्धार कर सभी स्वतंत्रता सेनानियों के नाम दोबारा स्पष्ट रूप से अंकित किए जाने चाहिए। नंदगंज क्षेत्र के लोगों में उस समय उम्मीद जगी थी, जब सदर विधायक जै किशन साहू ने विधानसभा के सत्र में नंदगंज में हुए स्वतंत्रता आंदोलन और यहां के क्रांतिकारियों के बलिदान को याद करते हुए शहीद स्तंभ बनाए जाने की मांग उठाई थी। लोगों को उम्मीद थी कि जनप्रतिनिधि की पहल के बाद अब नंदगंज में शहीद स्तंभ के निर्माण का रास्ता साफ होगा, लेकिन आज तक यह मांग पूरी नहीं हो सकी। क्षेत्रवासियों का कहना है कि नंदगंज के स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास को संरक्षित करने के लिए केवल स्मारक बनाना ही नहीं, बल्कि उस पर शहीद हुए क्रांतिकारियों के नाम अंकित करना, घटनाओं का संक्षिप्त इतिहास प्रदर्शित करना और शहीद पार्क विकसित करना भी जरूरी है। इससे स्थानीय युवाओं और आने वाली पीढ़ियों को अपने क्षेत्र के स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान की जानकारी मिल सकेगी। नंदगंज क्षेत्र के लोगों का कहना है कि देश की आजादी के लिए यहां के क्रांतिकारियों ने अपना जीवन न्योछावर किया। इसके बावजूद आज तक इस ऐतिहासिक स्थान को वह सम्मान नहीं मिल सका, जिसका यह हकदार है। लोगों ने शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि स्वतंत्रता संग्राम के नायक बाबू भोला नाथ सिंह की प्रतिमा स्थापित कराई जाए, नंदगंज में भव्य शहीद स्तंभ और शहीद पार्क का निर्माण कराया जाए तथा पुराने शहीद स्तंभों का संरक्षण किया जाए। क्षेत्रवासियों का कहना है कि नंदगंज की धरती के उन वीरों की गाथा को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना समाज और सरकार दोनों की जिम्मेदारी है। शहीदों के बलिदान को केवल स्मृति दिवस तक सीमित न रखकर उनके नाम और इतिहास को स्थायी रूप से संरक्षित किया जाना चाहिए। नंदगंज के अगस्त क्रांति के सभी अमर शहीदों को श्रद्धांजलि और देश की आजादी के लिए संघर्ष करने वाले सभी स्वतंत्रता सेनानियों को शत-शत नमन।

 

[smartslider3 slider="4"]

About admin

Check Also

जिला पंचायत अध्‍यक्ष, प्रमुख व प्रधान को मिल सकता है एक और कार्यकाल

गाजीपुर। समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग पंचायत आरक्षण पर अपनी रिपोर्ट नवंबर-दिसंबर में ही दे पाएगा। …