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गाजीपुर: मिट्टी के साथ मनुष्‍य के सेहत पर भी कीटनाशको का पड़ रहा है दुष्‍प्रभाव- जिला कृषि रक्षा अधिकारी

गाजीपुर। जिला कृषि रक्षा अधिकारी उमेश कुमार ने बताया है कि बागवानी व अन्य फसलों को बचाने के किसान हर साल हजारों किलो कीटनाशकों प्रयोग कर मिट्टी और हवा में मिला रहे हैं। इससे मिट्टी के साथ मनुष्य की सेहत पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे में सोलर व बायों ट्रैप जैसे उपकरण कारगर हैं। बागवानी में लाल और पीले रंग की पट्टियां जिन्हे स्टिकी ट्रैप कहा जाता है, का जगह-जगह टहनियों पर लटकाकर प्रयोग कर सकते हैं। जनपद में किसान हर वर्ष फसलों को बचाने के लिए कई हजार किलोग्राम कीटनाशक का प्रयोग कर फसलों को बचाते है। किसानों को उनके स्थान पर जैविक कीटनाशकों के प्रयोग करने पर जोर दिया जाता है। इसके लिए गोष्ठी और अन्य अवसरों पर जागरूक किया जाता है। अब फसलों को कीटों के हमले से बचाने के लिए सोलर और बायो उपकरण उपलब्ध हैं। इसमें सोलर ट्रैप ऐसा उपकरण है, जो दिन में सूर्य की रोशनी से चार्ज होता है और रात में जलता है। इससे बाग या फसल में लटका दिया जाता है। इसे देखकर रात में कीट आकर्षित होते है और लाइट के नीचे के हिस्से में प्लास्टिक के कटोरेनुमा हिस्से में जमा हो जाते हैं। इसकी कीमत 635 रूपये है। सरकार की ओर से 431 रूपये का अनुदाना दिया जा रहा है। शेष राशि किसान को देनी होगी। यह उपकरण बीज गोदामों पर उपलब्ध है। बायो ट्रैप उपकरण आम, अमरूद, अनार व अन्य बागवानी फसलों के साथ कद्दूवर्गीय व अन्य सब्जियों को फल मक्खी के हमले से बचाता है। ट्रैप में लियोर लगाकर ट्रैप को फसल से 1-2 फीट ऊपर भूमि की ओर ढक्कन कर लटका देना चाहिए। लियोर में ऐसा रसायन लगा होता है, जिसमें मादा कीट जैसी गंध आती है, जिससे नर कीट आकर्षित होते हैं। ट्रैप में लियोर को 20-25 दिनों के अंतराल में बदल देना चाहिए। इसमें इकट्ठे होने वाली मक्खी को जमीन में दबा देना चाहिए। एक ट्रैप की लियोर सहित कीमत 100 रूपये है।

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