गाजीपुर। दहेज हत्या के एक मामले में जिला जज धर्मेंद्र कुमार पांडेय की अदालत ने शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने मृतका के पति को 10 वर्ष तथा सास और ससुर को 7-7 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। तीनों दोषियों पर 10-10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। इमरजेंसी के रजिस्टर में छेड़छाड़ करने पर तैनात चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई करने का दिया आदेश। जिला शासकीय अधिवक्ता कृपा शंकर राय ने बताया कि थाना कोतवाली क्षेत्र के कपुरपुर देहाती निवासी विक्की कुमार ने थाना मोहम्मदाबाद में तहरीर दी थी। उन्होंने बताया कि उनकी बहन अनिता कुमारी की शादी वर्ष 2017 में मोहम्मदाबाद थाना क्षेत्र के आदिलाबाद निवासी पवन कुमार से हुई थी। दंपति का एक पुत्र अरुण कुमार था, जिसकी उम्र घटना के समय करीब दो वर्ष थी। अभियोजन के अनुसार, 27 जून 2020 की सुबह पवन कुमार अपनी पत्नी और पुत्र को मायके से लेकर आदिलाबाद स्थित अपने घर गया। उसी दिन करीब 11 बजे अनिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। वादी ने आरोप लगाया कि पति, सास और ससुर ने मिलकर उसे जहर देकर मार डाला।सूचना पर पुलिस ने 27 जून 2020 को मुकदमा दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। विवेचना पूरी होने के बाद आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया।मामले के विचारण के दौरान अभियोजन की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता कृपाशंकर राय ने आठ गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद न्यायालय ने तीनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई। निर्णय में न्यायालय ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोहम्मदाबाद में तैनात डॉ. आकाश कुमार की भूमिका पर भी गंभीर टिप्पणी की। अदालत ने आदेश के पैरा-30 में उल्लेख किया कि आकस्मिक रजिस्टर में कथित छेड़छाड़ कर अभियुक्तों को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया।मामले को गंभीरता से लेते हुए न्यायालय ने मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) गाजीपुर को डॉ. आकाश कुमार के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
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