गाजीपुर। 51 वें मानस सम्मेलन के दूसरे दिन प्रवचन करते हुए आचार्य चन्द्रेश जी महाराज ने कहा कि एक मां 3-4 बच्चों को पाल लेती हॆ परन्तु वही दूसरी तरफ 3-4 बच्चे एक मां की सेवा नही कर पाते हॆ।निर्धन धनवान से डरता हॆ,दुर्बल बलवान से डरता हॆ परन्तु सारी दुनियां चरित्रवान से डरता हॆ जिसका चरित्र ऊंचा होता हे वह सर्वत्र पूज्य हॆ। जिसको सारी दुनियां छोङ देती हॆ प्रभु उसे अपना बना लेते।सति ने परीक्षा लिया तन त्याग करना पङा,सेवरी ने प्रतिक्षा किया उसे भगवान का दर्शन हुआ।आज लोग श्रीराम को मानते हॆ परन्तु श्रीराम की नही मानते है। भगवान शिव विबाह पर चर्चा करते हुए श्री आचार्य जी ने कहा कि सती आग मे जल चुकी थी लेकिन उनकी इच्छा यही थी की शिव जी हमेशा पति के रुप मे मिले।इसलिए नारद के कहने पर घोर तपस्या किया।भगवान शिव समाधि मे संलग्न थे।कामदेव ने तपस्या भंग करना चाहा परन्तु जल कर भष्म हो गया।सभी देवताओं ने मिल कर शिव से विनती कर विबाह करने का आग्रह किया।विबाह मे भूत,प्रेत,पिचास,सांप,विच्छू गोजर बराती बने।परिछन के समय शिव को दुल्हा के रूप में देखकर मॆना आरती की थाली फेककर चली गयी परन्तु शिव ने अपमान को सम्मान के रुप मे देखा।नारद ने पूर्व जन्म का वर्णन किया तो मॆना का भ्रम दूर हो गया।इस अवसर पर नरेन्द्र कुमार मॊर्य , अर्जुन पाण्डेय ,अवधेश मॊर्य ,दयाराम गुप्ता ,त्रिलोकीनाथ गुप्ता , रामनरेश मॊर्य, आदि लोग प्रमुख रूप से मॊजूद थे।अध्यक्षता प्रभुनाथ पाण्डेय व संचालन रामसुधार पाण्डेय ने किया।
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