ग़ाज़ीपुर। आज श्रावण के माह का पहला त्यौहार नाग पंचमी है। नाग पंचमी जैसा कि नाम से पता चलता है, श्रावण शुक्ल पंचमी को मनाया जाता है।इस दिन महिलाएँ व्रत रखती हैं और नए कपड़े व आभूषण पहनती हैं और अपने भाई के स्वास्थ्य और सफलता के लिए नाग देवता की पूजा करती हैं। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन की गई पूजा से साँपों और साँप के काटने का डर समाप्त हो जाता है। ऐसा कहा जाता है कि सर्पयज्ञ करने वाले राजा जनमेजय को आस्तिक ऋषि ने प्रसन्न किया। जनमेजय ने जब उनसे वरदान मांगने को कहा तो आस्तिक ऋषि ने सर्पयज्ञ रोकने का अनुरोध किया। जिस दिन जनमेजय ने सर्पयज्ञ रोका वह श्रावण शुक्ल पक्ष पंचमी थी। जिस दिन श्री कृष्ण ने विषैले नाग कालिया और उसके परिवार को पवित्र यमुना नदी छोड़ने के लिए बाध्य किया वह श्रावण शुक्ल पक्ष पंचमी थी। पूर्व काल में सत्येश्वरी नाम की एक देवी थी। सत्येश्वर उनके भाई थे, जिनकी मृत्यु नाग पंचमी की पूर्व संध्या पर हुई थी। दुखी सत्येश्वरी ने नाग पंचमी के दिन अपने भाई को नाग के रूप में देखा। उसी क्षण उन्हें विश्वास हो गया कि नाग ही उनका भाई है। उस समय नाग देवता ने उनसे प्रण किया कि वे उन सभी महिलाओं की रक्षा करेंगे जो उन्हें अपना भाई मानकर उनकी पूजा करेगी। इसलिए इस दिन हर महिला नाग की पूजा करके नाग पंचमी मनाती है।नाग पंचमी के त्यौहार पर नंदगंज व आसपास ग्रामीण क्षेत्र में महिला/पुरुष सुबह से नाग देवता को दूध,लावा आदि चढ़ा कर पूजा किया।
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