गाजीपुर। विगत कुछ वर्षों से जलवायु परिवर्तन होने के कारण मIनसून परिसंचरण में रुकावट उत्पन्न होने लगा है जिसके कारण मIनसून के आगमन और वर्षा वितरण में अनियमितता देखने को मिल रहा है और धIन की खेती प्रभावित हो रही है I कृषि विज्ञान केंद्र आंकुशपुर, गाजीपुर के मृदा वैज्ञानिक डॉ0 दीपक प्रजापति ने बताया कि रोपड़ विधि द्वारI धIन की जलमांग और लIगत को देखते हूए धान की सीधी बुआई की संभावनाएं बढ़ती जा रही है I धान की सीधी बुआई या डीएसआर एक ऐसी तकनिक है जिसमें धान के पौधे को बिना नर्सरी में तैयार किए सीधे खेत में बुआई की जाती है I इसमें किसानों को धIन की रोपIई में आने वाली लIगत और श्रम की बचत होती है, जिसमें लगभग रुपया 6000 प्रति एकड़ कI लाभ किसान को मिलता है I डीएसआर विधि के अंतर्गत सीडड्रिल, पेड्डी ड्रमसीडर, सुपरसीडर या पारंपरिक विधि से बीज मिट्टी पर प्रसारण करके उसे ढक देना चाहिए I बुआई के समय 10 से 12 किग्रा0 बीज प्रति एकड़ एवम पोषक तत्त्व प्रबंधन हेतु 50 किग्रा0 नत्रजन, 25 किग्रा0 फास्फोरस, 25 किग्रा0 पोटाश के साथ साथ 10 से 12 किग्रा0 जिंक सल्फेट की अवश्यकता पड़ती है I वरिष्ठ वैज्ञानिक एवम अध्यक्ष (सस्य विज्ञान) डॉ0 जे0 पी0 सिंह ने किसानों को अवगत कराया कि इस विधि से अधिक उत्पादन प्राप्त हेतु खरपतवार प्रबंधन अतिअIवश्यक है I अगर समयानुसIर खरपतवारों का नियन्त्रण कर दिया जाए तो उत्पादन 10 से 15% बढ़ जाता है I इसके लिए कौंसिल एक्टिव (पूर्वउद्भव खरपतवार नाशी ) की 90 ग्राम मात्रा प्रति एकड़ की दर से बुआई के 2-3 दिन के अंदर प्रयोग करना चाहिए जिससे खरपतवारों का जमाव कम होता है, किसी कारणवश यदि किसान भाई उपरोक्त खरपतवार नाशी नहीं प्रयोग कर पाया है तो बुआई के 20-25 दिन के अंदर बिस्पायरिबैक सोडियम 10% SC को 100 मिली0 की मात्रा प्रति एकड़ की दर से 200-225 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें I अगर खेत में चौड़ी पत्ती के खरपतवार हों तो 300 ग्राम 2, 4-D सोडियम लवण की मात्रा को बिस्पायरिबैक सोडियम के साथ मिलाकर छिड़काव करना चाहिए I
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