गाजीपुर। जिले में विश्वविद्यालय, नंदगंज सिहोरी चीनी मिल और बड़ौदा कताई मिल पर डबल इंजन की सरकार की नजर कब पड़ेगी। सीएम योगी के युसुफपुर मुहम्मदाबाद के जनसभा के बाद जनपदवासी चट्टी-चौराहों पर यही सवाल उठा रहे हैं। 692 करोड़ रुपये के 262 परियोजनाओं के शिलान्यास और लोकार्पण के बाद मुख्यमंत्री ने जनपद की मूलभूत इन तीनों आवश्यकताओं पर एक बार भी प्रकाश नही डाला और न ही यहां के जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री जी का इस ओर ध्यान आकृष्ट कराया। गाजीपुर में विश्वविद्यालय के मानक से अधिक करीब 250 महाविद्यालय संचालित हो रहे हैं लेकिन अभी तक विश्वविद्यालय के निर्माण के तरफ उत्तर प्रदेश सरकार का ध्यान नही गया। जबकि बलिया, जौनपुर, और आजमगढ़ में विश्वविद्यालय बन चुके हैं। वहीं नंदगंज चीनी मिल करीब चार दशकों से बंद पड़ी हुई हैं। इस चीनी मिल के बंद होने से जनपद सहित कई जिलों में गन्ना की बुआई खत्म हो गयी। जिससे किसानों के आय पर काफी असर पड़ा। बहादुरगंज के बड़ौदा कताई मिल भी करीब दो दशकों से अधिक समय से बंद पड़ी है। इसके कलपुर्जे भी बिक गये हैं या चोरी हो गये हैं। इमारते भी गिर गयी हैं। आसपास के लोग सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर रहे हैं। चुनाव के समय सारे जनप्रतिनिधि इस मिल को चलाने की बात करते हैं लेकिन चुनाव बीतने के बाद कोई ध्यान नही देता है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि गाजीपुर लोकसभा और विधानसभा में कमल का फूल नहीं खिलने से डबल इंजन की सरकार का इस जिले पर बहुत नजरे इनायत नही रहता है।
Ghazipur Khabar जोड़े आपको ग़ाज़ीपुर से..