गाजीपुर। जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार ने बताया है कि बदलते मौसम, सम्भावित कम वर्षा और गिरते भूजल स्तर के बीच इस बार खरीफ मौसम में धान की खेती को लेकर कृषि विभाग ने नई रणनीति तैयार की है। विभाग का पूरा जोर धान की पारंपरिक रोपाई की जगह सीधी बोआई को बढ़ावा देने पर है। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, डीएसआर (डायरेक्ट सीडेड ऑफ राइस) तकनीकी को अपनाकर किसान 30 से 35 प्रतिशत तक पानी की बचत आसानी से कर सकते है। शासन की ओर से जनपद को 129532 हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की बोआई का लक्ष्य दिया है। इस लक्ष्य को समय से और वैज्ञानिक तरीके से पूरा करने के लिए कृषि विभाग के अधिकारी और कर्मचारी गांवों में जाकर किसानों को जागरूक कर रहे है। पारंपरिक तरीके से धान उगाने के लिए पहले नर्सरी तैयार करनी पड़ती है, और फिर भरे हुए पानी के खेतों में कद्दू करके मजदूरों द्वारा रोपाई की जाती है। इस प्रक्रिया में पानी और मजदूरी दोनो बहुत ज्यादा लगती है। कृषक भाई धान की पारंपरिक रोपाई की जगह अब डीएसआर तकनीकी से धान की सीधी बोआई करने पर खेत में हर समय पानी भरकर रखने की जरूरत नही होती, इससे 50-60 प्रतिशत तक पानी बचता है। नर्सरी तैयार करने और रोपाई के महंगे लेबर खर्च से मुक्ति मिलती है। फसल करीब सात से 10 दिन पहले पककर तैयार हो जाती है, जिससे अगली फसल के लिए समय मिल जाता है। कृषक भाईयों को अवगत कराया है कि 129532 हेक्टेयर के लक्ष्य को हासिल करने के लिए राजकीय कृषि बीजों के गोदामों पर पर्याप्त मात्रा में बीज उपलब्ध करा दिए गए है। किसानों को सलाह दी है कि वह डीएसआर तकनीकी सीधी बोआई करते समय खरपतवार नाशक (पेंटी मेथलीन) दवा का सही समय पर छिड़काव जरूर करें क्योकि इस विधि में शुरूआती दिनों में खेत सूखा होने के कारण घास उगने की आशंका रहती है।
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