गाजीपुर। केंद्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीब एवं आवासहीन परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमानिया तहसील के ग्राम सभा देवैथा का एक परिवार आज भी झोपड़ी में रहने को मजबूर है। यह मामला सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।ग्राम सभा देवैथा निवासी दारोगा बिंद पुत्र नरसिंह बिंद का परिवार वर्षों से कुश-टाटी की मड़ई डालकर जीवन यापन कर रहा है। भीषण गर्मी, आंधी-तूफान और बारिश के दौरान परिवार को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। आर्थिक रूप से कमजोर यह परिवार किसी तरह अपना भरण-पोषण कर रहा है, लेकिन आज तक प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिल सका।पीड़ित दारोगा बिंद का कहना है कि वर्ष 2017 से वह ग्राम प्रधान और संबंधित अधिकारियों के यहां लगातार चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन आज तक उन्हें आवास स्वीकृत नहीं हुआ। उनका आरोप है कि कई बार आवेदन और अनुरोध के बावजूद उनकी समस्या पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।गौरतलब है कि सरकार द्वारा जिले में बड़ी संख्या में प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए जाने का दावा किया जाता है, लेकिन देवैथा गांव का यह परिवार उन दावों की हकीकत बयां कर रहा है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर वास्तविक पात्र होने के बावजूद यह गरीब परिवार योजना के लाभ से कैसे वंचित रह गया।स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि ग्राम सभा में हुए विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई ऐसे मामले सामने आ सकते हैं, जहां कागजों पर विकास दिखाया गया है लेकिन धरातल पर उसकी वास्तविकता कुछ और है।अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं। देखना यह होगा कि जिलाधिकारी इस मामले का संज्ञान लेकर दारोगा बिंद के परिवार को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाते हैं या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।गरीब परिवार की बदहाल स्थिति और वर्षों से आवास की आस लगाए बैठे दारोगा बिंद की कहानी सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत को उजागर कर रही है।
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