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कृषि विज्ञान केंद्र, आंकुशपुर में धान बीज उत्पादन तक्नीकी प्रशिक्षण सम्पसन्नो

गाजीपुर। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज,अयोध्या के अंतर्गत संचालित कृषि विज्ञान केंद्र, आंकुशपुर गाजीपुर-11 द्वारा धान बीज उत्पादन तक्नीकी केंद्र पर 19 से 23 मई,2026 तक पांच दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. राम गोपाल यादव,  कृषि  वैज्ञानिक डॉ. ए. के. सिंह , डॉ. नरेंद्र प्रताप, डॉ. शशांक सिंह, डॉ. दीपक प्रजापति, एवं डॉ पंकज कुमार ने किसानों को अवगत कराया कि सामान्य धान की तुलना में प्रमाणित बीज से 15-20% ज्यादा पैदावार मिलती है। किसानों को खेत से मंडी तक शुद्ध बीज तैयार करने की पूरी प्रक्रिया समझाई।बीज उत्पादन के लिए ऐसे खेत का चुनाव करें जिसमें पिछले साल धान न बोया गया हो। दूसरी किस्मों से संदूषण रोकने के लिए 3 मीटर की दूरी जरूरी है। किसान सिर्फ बीज प्रमाणीकरण संस्था, कृषि विश्वविद्यालय या एन,एस,सी से आधार बीज ही खरीदें। एक बार अच्छा बीज तैयार हो जाए तो किसान 3 साल तक उसी बीज को आधार बनाकर आगे बढ़ सकता है। 25-30 दिन की पौध ही रोपें। रोपाई 20 x10 सेमी दूरी पर करें। इससे हर पौधे को हवा-धूप पूरी मिलेगी और रोग कम लगेंगे।ज्यादा यूरिया से पौध गिरेगा और बीज पतला बनेगा। दाना बनते समय खेत में 5 सेमी पानी जरूर रखें। वैज्ञानिकों ने किसानों को बताया कि फसलों से अधिक और गुणवत्तापूर्ण पैदावार लेने के लिए रासायनिक उर्वरकों का संतुलित प्रयोग बेहद जरूरी है। खेतों में बिना सोचे-समझे केवल यूरिया या डीएपी डालने से न सिर्फ मिट्टी की सेहत बिगड़ रही है बल्कि किसानों की खेती की लागत भी लगातार बढ़ रही है। आधुनिक कृषि यंत्र और वैज्ञानिक तकनीक का मेल आज जैविक खेती के लिए सबसे मजबूत आधार बन चुका है।इन तीनों के समन्वय से न केवल मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है बल्कि किसानों की आय में भी भारी वृद्धि होती हैं । जैविक खेती की शुरुआत पशुओं के बिना अधूरी है। गाय और भैंस का गोबर और गोमूत्र, जीवामृत, घनजीवामृत और प्राकृतिक खाद बनाने के प्राथमिक स्रोत हैं। पशु केवल दूध ही नहीं देते, बल्कि खेत को नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश जैसे पोषक तत्व प्राकृतिक रूप से प्रदान करते है।  कार्यक्रम के अंत में विशेषज्ञों ने किसानों से अपील की कि धान बीज उत्पादन में ईमानदारी सबसे बड़ी पूंजी है। रोगिंग और नमी नियंत्रण पर सबसे ज्यादा ध्यान दें। वैज्ञानिक सलाह के अनुसार उर्वरकों का प्रयोग करें, जिससे खेती अधिक लाभकारी और टिकाऊ बन सके। कार्यक्रम में प्रगतिशील कृषक सीताराम लालजी मनिराज सुरेन्द्र एवं मालती देवी , सोनम देवी आदि कृषक महिलाओं ने प्रतिभाग किया।

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