ग़ाज़ीपुर। भीषण गर्मी के इस दौर में नंदगंज बाजार का हाल आम लोगों के लिए बेहद परेशानी भरा हो गया है। सूरज की तेज़ तपिश और गर्म हवाओं के बीच जहां लोग कुछ कदम चलने में ही थक जा रहे हैं, वहीं इस बड़े और व्यस्त बाजार में प्यास बुझाने के लिए एक भी सार्वजनिक प्याऊ का न होना लोगों के लिए बड़ी समस्या बन गया है। नंदगंज बाजार में प्रतिदिन दूर-दराज़ गांवों से हजारों लोग खरीदारी के लिए पहुंचते हैं। इनमें महिलाएं, बुज़ुर्ग और छोटे-छोटे बच्चे भी शामिल होते हैं, जिन्हें अक्सर घंटों बाजार में रहना पड़ता है। लेकिन इस दौरान जब उन्हें प्यास लगती है, तो उन्हें पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। मजबूरी में लोग दुकानों पर बिकने वाला महंगा बोतलबंद पानी खरीदने को विवश हो जाते हैं, जो खासकर गरीब और मजदूर वर्ग के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ साबित हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बाजार में कुछ प्रमुख स्थानों पर अस्थायी प्याऊ या ठंडे पानी की व्यवस्था कर दी जाए, तो राहगीरों को काफी राहत मिल सकती है। यह न केवल एक सुविधा होगी, बल्कि मानवता के प्रति एक महत्वपूर्ण कदम भी होगा। इस मुद्दे ने समाज और प्रशासन दोनों की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर प्रशासन की तरफ से अब तक कोई ठोस पहल देखने को नहीं मिली है, वहीं दूसरी ओर सक्षम व्यापारी वर्ग और समाजसेवी संस्थाएं भी इस दिशा में सक्रिय नजर नहीं आ रही हैं। बुज़ुर्गों का कहना है कि पहले के समय में लोग पुण्य कमाने के लिए जगह-जगह प्याऊ लगवाते थे, कुएं खुदवाते थे और तालाब बनवाते थे, ताकि राहगीरों को गर्मी में राहत मिल सके। लेकिन आज आधुनिकता और व्यस्त जीवनशैली के बीच यह परंपरा धीरे-धीरे समाप्त होती जा रही है, जिससे इंसानियत कहीं न कहीं पीछे छूटती दिख रही है। भीषण गर्मी के बीच नंदगंज बाजार की यह स्थिति एक आईना बनकर सामने आई है, जो यह सोचने पर मजबूर करती है कि विकास की दौड़ में कहीं हम मानवीय मूल्यों को तो नहीं भूलते जा रहे हैं। ऐसे में जरूरत है कि प्रशासन, व्यापारी वर्ग और समाजसेवी संस्थाएं मिलकर इस दिशा में पहल करें, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके और समाज में सेवा और सहयोग की भावना को फिर से जीवित किया जा सके।
Ghazipur Khabar जोड़े आपको ग़ाज़ीपुर से..