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हंता वायरस: कोरोना से ज्यादा खतरनाक या सिर्फ डर? जानिए पूरी सच्चाई

डा. प्रशान्त राय

गाजीपुर। कोरोना महामारी के बाद दुनिया अब हर नए वायरस को लेकर सतर्क हो चुकी है। हाल ही में “हंता वायरस” (Hantavirus) का नाम फिर सुर्खियों में आया, जब एक अंतरराष्ट्रीय क्रूज़ शिप पर इसके कई मामले सामने आए। सोशल मीडिया पर इसे लेकर डर और अफवाहें तेजी से फैलने लगीं। कई लोग इसे “अगला कोरोना” कहने लगे। लेकिन क्या वास्तव में हंता वायरस उतना ही खतरनाक है? आइए आसान भाषा में समझते हैं इसकी पूरी कहानी।

क्या है हंता वायरस?

हंता वायरस एक RNA वायरस है, जो मुख्य रूप से चूहों और अन्य कृंतकों (Rodents) के जरिए फैलता है। इसका नाम दक्षिण कोरिया की “हंतान नदी” के नाम पर रखा गया, जहां इस वायरस का पहली बार वैज्ञानिक अध्ययन हुआ था। यह वायरस इंसानों में मुख्यतः दो गंभीर बीमारियां पैदा करता है।

HPS (Hantavirus Pulmonary Syndrome) फेफड़ों पर असर

HFRS (Hemorrhagic Fever with Renal Syndrome) किडनी पर असर

हालांकि यह वायरस नया नहीं है, लेकिन हाल के मामलों ने इसे फिर चर्चा में ला दिया है।

यह फैलता कैसे है?

हंता वायरस कोरोना की तरह इंसान से इंसान में तेजी से नहीं फैलता। इसका मुख्य स्रोत संक्रमित चूहे होते हैं। संक्रमण के प्रमुख कारण: चूहों के मल, मूत्र या लार के संपर्क में आना सूखे मल-मूत्र की धूल सांस के जरिए शरीर में जाना संक्रमित चूहे के काटने से बंद और गंदी जगहों की सफाई के दौरान exposure विशेषज्ञों के अनुसार केवल “Andes Virus” नामक strain में सीमित human-to-human transmission देखा गया है।

इसके लक्षण कितने खतरनाक हैं?

शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल फीवर जैसे लग सकते हैं  जैसे तेज बुखार, शरीर और मांसपेशियों में दर्द, थकान, सिरदर्द, उल्टी और चक्कर, लेकिन 4–10 दिनों के भीतर स्थिति गंभीर हो सकती है। मरीज के फेफड़ों में पानी भरने लगता है, सांस लेने में दिक्कत होती है और कई मामलों में किडनी फेलियर भी हो सकता है। यही कारण है कि इसकी मृत्यु दर कई strains में 30% से 40% तक मानी जाती है, जो कोरोना से अधिक है।

कोरोना vs हंता वायरस

कोरोना और हंता वायरस दोनों ही गंभीर संक्रमण हैं, लेकिन इनके फैलने और असर करने का तरीका काफी अलग है। कोरोना वायरस इंसान से इंसान में बहुत तेजी से फैलता है, इसलिए उसने महामारी का रूप ले लिया था, जबकि हंता वायरस मुख्यतः संक्रमित चूहों और उनके मल-मूत्र के संपर्क से फैलता है और इसका मानव-से-मानव संक्रमण बेहद दुर्लभ माना जाता है। कोरोना की मृत्यु दर अपेक्षाकृत कम थी, लेकिन हंता वायरस के कुछ मामलों में मृत्यु दर काफी अधिक देखी गई है। राहत की बात यह है कि हंता वायरस फिलहाल COVID-19 जितना संक्रामक नहीं माना जाता, इसलिए इसके वैश्विक महामारी बनने की संभावना काफी कम समझी जा रही है।

वैक्सीन उपलब्धता और उपयोग

हंता वायरस की अभी दुनिया भर में सामान्य उपयोग वाली वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। China और South Korea में कुछ सीमित वैक्सीन इस्तेमाल होती हैं। लेकिन ये सभी प्रकार के हंता वायरस पर पूरी तरह प्रभावी नहीं मानी जातीं। फिलहाल इलाज में मरीज की सांस, ऑक्सीजन और किडनी को सपोर्ट दिया जाता है। इसका बचाव और साफ-सफाई ही सबसे बड़ा सुरक्षा उपाय माना जाता है।

क्या भारत को डरने की जरूरत है?

भारत में अभी तक हंता वायरस का कोई बड़ा outbreak सामने नहीं आया है। हालांकि भारत में चूहों की बड़ी संख्या और कई जगहों पर स्वच्छता की कमी को देखते हुए सतर्कता जरूरी है। फिर भी विशेषज्ञ मानते हैं कि यह वायरस COVID जैसा तेजी से नहीं फैलता human-to-human transmission बेहद दुर्लभ है। इसलिए भारत में इसके महामारी बनने की संभावना फिलहाल बहुत कम है। स्वास्थ्य एजेंसियां निगरानी बनाए हुए हैं, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं बताई गई है।

बचाव ही सबसे बड़ा इलाज

हंता वायरस की अभी कोई निश्चित वैक्सीन या विशेष इलाज नहीं है। इसलिए बचाव सबसे जरूरी है। घर और गोदाम साफ रखें, चूहों को पनपने न दें बंद जगहों की सफाई में मास्क और दस्ताने पहनें चूहों के मल-मूत्र को सीधे झाड़ू से साफ न करें disinfectant या ब्लीच का इस्तेमाल करें।

निष्कर्ष

हंता वायरस गंभीर जरूर है, लेकिन यह कोरोना जैसा “तेजी से फैलने वाला वायरस” नहीं माना जाता। इसकी सबसे बड़ी चिंता इसकी उच्च मृत्यु दर है, जबकि सबसे बड़ी राहत यह है कि यह आसानी से इंसानों में नहीं फैलता। डर नहीं, जागरूकता जरूरी है। कोरोना ने दुनिया को यह सिखाया कि समय रहते सावधानी और सही जानकारी ही सबसे बड़ा बचाव है।

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