गाजीपुर। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज,अयोध्या के अंतर्गत संचालित कृषि विज्ञान केंद्र आंकुशपुर गाजीपुर के द्वारा ग्राम- धितुआ ब्लॉक- करण्डा में किसानों को जागरूक करने हेतु उर्वरकों का संतुलित प्रयोग विषय पर एक विशेष जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया और विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, लागत में कमी और उत्पादन वृद्धि के लिए उर्वरकों के संतुलित उपयोग के प्रति जागरूक करना रहा। कार्यक्रम के दौरान डॉ. नरेंद्र प्रताप (वैज्ञानिक पादप प्रजनन)ने किसानों को विस्तार से बताया कि लगातार असंतुलित उर्वरक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता घट रही है। उन्होंने किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर ही उर्वरकों के प्रयोग की सलाह दी। डॉ. दीपक प्रजापति (मृदा वैज्ञानिक)ने किसानों को उर्वरकों के सही समय और सही विधि से प्रयोग करने की तकनीक समझाई। नत्रजन, फॉस्फोरस और पोटाश के साथ-साथ सूक्ष्म पोषक तत्वों का संतुलन भी आवश्यक है। उन्होंने यह भी समझाया कि जैविक खाद और रासायनिक उर्वरकों का समन्वित उपयोग ही टिकाऊ खेती का आधार है। कम्पोस्ट,केंचुआ खाद ,हरी खाद,गोबर की खाद ,जीवामृत , बीजामृत ,घनजीवामृत, वास्पा एवं आच्छादन‚ बीज शोधन आदि घटक पर किसानों को विस्तार से बतायाI कार्यक्रम में डॉ. पंकज कुमार (कृषि अभियांत्रिकी वैज्ञानिक) ने किसानों को जैविक विकल्पों और नवीन तकनीकों के बारे में जागरूक किया। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों पर पूरी तरह निर्भर रहना दीर्घकाल में नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाना जरूरी है। उन्होंने किसानों को यह भी बताया कि संतुलित उर्वरक प्रयोग से न केवल उत्पादन बढ़ता है बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता भी लंबे समय तक बनी रहती है। कार्यक्रम के अंत में विशेषज्ञों ने किसानों से अपील की कि वे वैज्ञानिक सलाह के अनुसार उर्वरकों का प्रयोग करें, जिससे खेती अधिक लाभकारी और टिकाऊ बन सके।
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