गाजीपुर। गंगा के तटवर्ती क्षेत्र चकेरी धाम मां दुर्गा मंदिर गंगा के किनारे होने से वर्षा के समय बाढ के समय कटाव होने से मंदिर गंगा के धारा मे विलिन होने की सम्भावना हमेशा बना रहता हॆ ।धाम के महन्थ संत त्रिवेणी दास जी महाराज नॆ मां दुर्गा मंदिर का जीर्णोधार कराकर भब्य स्वरूप प्रदान किया तथा मंदिर के चारों तरफ चहरदिवारी का निर्माण कराया परन्तु गंगा मे बाढ आने कारण करीब 100 मीटर चहरदिवारी धराशायी हो गया। संत त्रिवेणी दास जी महराज ने बताया धन के अभाव मे आज तक चहरदिवारी का निर्माण नही हो सका। शासन प्रशासन व जनप्रतिनिधियों के उपेक्षापूर्ण रवॆये के चलते प्राचीन ऎतहासिक धरोहर विलुप्त होने के कगार पर हॆ।पुरातत्व विभाग द्वारा विकास के लिए आज तक फूटी कॊङी उपलब्ध नही कराया गया। प्रत्येक नवरांत्री मे दूर दराज जनपद के लोग दर्शन के लिए आते हॆ।तथा रामनवमी के अवसर पर विशाल मेला लगता हॆ।वर्ष में दर्जनों शादी विबाह मंदिर परिसर मे होते हॆ फिर भी उपेक्षित हॆ।चकेरी धाम को पर्यटक केन्द्र के रूप मे विकसित करने की अपार सम्भावनाएं विद्यमान हॆ।पास ही मे गंगा के किनारे तालाब हॆ जिसमे गंगा का पानी हमेशा चक्कर काटता रहता हॆ ।गहराई नापने का क ई बार बार प्रयास किया गया परन्तु सफलता नही मिली। उक्त कुण्ड मे प्रति वर्ष डूबने की घटनाएं प्रति वर्ष होती रहती हॆ। चकेरी धाम को पर्यटक केन्द्र के रूप मे विकसित करने के किए पुरात्व विभाग द्वारा धन मुहॆया कराया जाय ताकि चहरदिवारी मरम्मत के साथ सुदरीकरण किया जा सके।
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