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नंदगंज में आरओ पानी की गुणवत्ता पर उठे सवाल, गंदे जार में सप्लाई हो रहा पानी, जांच और कार्रवाई की मांग तेज

गाज़ीपुर। नंदगंज बाजार और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित दर्जनों आरओ प्लांटों से सप्लाई किए जा रहे पानी की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। क्षेत्र के नागरिकों, दुकानदारों और उपभोक्ताओं का आरोप है कि बड़े जार (20 लीटर बोतल) में वितरित किया जा रहा पानी स्वच्छता और गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतर रहा है। नंदगंज बाजार सहित आसपास के गांवों में आरओ प्लांट संचालक 20 लीटर के बड़े जार में पानी भरकर टोटो, पिकअप और अन्य वाहनों के माध्यम से प्रतिदिन दुकानों, होटलों और घरों तक सप्लाई कर रहे हैं। शुद्ध पेयजल की आवश्यकता के कारण बड़ी संख्या में लोग इन जारों पर निर्भर हैं। हालांकि उपभोक्ताओं का कहना है कि पानी पीते समय स्वाद और गुणवत्ता में अंतर महसूस होता है, जिससे इसकी शुद्धता पर संदेह गहराता जा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार जिन बड़े जारों में पानी की आपूर्ति की जा रही है, वे अत्यंत गंदे और जर्जर हालत में हैं। कई जारों पर काई जमी होने, ढक्कनों के ढीले होने और प्लास्टिक के घिसे होने की शिकायतें सामने आई हैं। नियमों के अनुसार पानी सप्लाई करने वाले जारों को निर्धारित समय सीमा, लगभग दो माह के भीतर बदल दिया जाना चाहिए। लेकिन आरोप है कि महीनों से एक ही जार का उपयोग किया जा रहा है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। नागरिकों का कहना है कि कुछ आरओ प्लांट संचालक केवल मुनाफा कमाने में लगे हैं और साफ-सफाई व गुणवत्ता मानकों की अनदेखी कर रहे हैं। पानी की नियमित जांच, फिल्टर बदलने और मशीनों के रखरखाव में भी लापरवाही बरती जा रही है। लोगों का आरोप है कि संबंधित विभाग इस पूरे मामले से अनजान बना हुआ है। अब तक किसी प्रकार की व्यापक जांच या कार्रवाई नहीं की गई है। बाजार के दुकानदारों और क्षेत्रीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र में संचालित सभी आरओ प्लांटों की तत्काल जांच कराई जाए। साथ ही पानी की गुणवत्ता की लैब जांच कराकर उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, ताकि आम जनता को शुद्ध और सुरक्षित पेयजल मिल सके। स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य विभाग और खाद्य सुरक्षा विभाग से भी हस्तक्षेप की मांग की है। यदि समय रहते इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया तो यह सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकती है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि प्रशासन को शीघ्र कार्रवाई कर मानकों का पालन सुनिश्चित करना चाहिए, ताकि लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध हो सके और संभावित बीमारियों से बचाव किया जा सके।

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