गाजीपुर। ग्राम रायपुर, ( बौद्धगण)पोस्ट नोनहरा निवासी तेज बहादुर मौर्य ने शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल कर जिले और क्षेत्र का नाम रोशन किया है। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू), वाराणसी के शिक्षा संकाय से 12 दिसंबर 2025 को उन्हें डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की गई। वे अपने समाज और क्षेत्र के पहले युवक हैं जिन्होंने यह शैक्षणिक उपलब्धि प्राप्त की है। उनका जन्म 8 फरवरी 1991 को एक साधारण ग्रामीण परिवार में हुआ। वे चार भाइयों और दो बहनों में सबसे छोटे हैं। मात्र दस वर्ष की आयु में, 11 जुलाई 1999 को उनके पिता चंद्रिका कुशवाहा का परिनिर्वाण हो गया, जिसके बाद परिवार को गंभीर आर्थिक और सामाजिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इस कठिन समय में उनकी माता श्रीमती धानपति देवी, बड़े भाइयों और बहनों ने मिलकर परिवार की जिम्मेदारियाँ संभालीं और बच्चों की शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। अभावों के बावजूद वर्ष 2008 से परिवार ने यह संकल्प लिया कि बच्चों की पढ़ाई में कोई समझौता नहीं किया जाएगा। परिवार के सदस्यों ने स्वयं कठिन परिस्थितियों में रहते हुए बच्चों को शहर में रहकर शिक्षा दिलवाई। डॉ. तेज बहादुर मौर्य की शिक्षा के प्रति जागरूकता और दूरदृष्टि ने पूरे परिवार को शिक्षित बनने की दिशा दी। डॉ. मौर्य ने अपने शोध में मनो-सामाजिक कारकों और विद्यार्थियों की अंग्रेज़ी भाषा में सीखने की उपलब्धियों के बीच संबंध का अध्ययन किया। उनका शोध विषय ग्रामीण और वंचित पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी माना जा रहा है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार, माता-पिता, गुरुजनों और शुभचिंतकों को दिया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का सबसे सशक्त माध्यम है। वर्तमान में वे सहायक आचार्य बनने के लक्ष्य की दिशा में निरंतर प्रयासरत हैं। उनकी इस उपलब्धि से ग्राम रायपुर सहित पूरे क्षेत्र में हर्ष और गर्व का वातावरण है। स्थानीय लोगों का कहना है कि डॉ. तेज बहादुर मौर्य की सफलता ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है और यह सिद्ध करती है कि कठिन परिस्थितियों में भी शिक्षा के माध्यम से ऊँचाइयों को प्राप्त किया जा सकता है।
Ghazipur Khabar जोड़े आपको ग़ाज़ीपुर से..