गाजीपुर। मोहम्मदाबाद तहसील क्षेत्र के लट्ठूडीह में स्थित डालिम्स सनबीम स्कूल गांधी नगर के बोधि स्थलमंडल में अवस्थित उसके सुविधा सम्पन्न बहुउद्देशीय सभागार में हिन्दी दिवस का उत्सवधर्मिता से पुष्ट आयोजन अपनी बौद्धिक, शैक्षिक और सांस्कृतिक गरिमा के साथ भव्यता और उच्चता के साथ सम्पन्न हुआ। समारोह की दीक्षा डालिम्स सनबीम स्कूल गांधी नगर के प्रतापी निदेशक हर्ष राय की उपस्थिति में हिन्दी उत्सव के मुख्य अतिथि, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के पुराछात्र और प्रतिष्ठित ‘वीबीआर इंटरमीडिएट कॉलेज’ करीमुद्दीनपुर के प्राचार्य (सेवानिवृत्त) अवधेश नारायण राय द्वय ने महाश्वेता की मूर्ति का माल्यार्पण कर अस्तु दीप प्रज्ज्वलित कर किया, वस्तुतः हिन्दी उत्सव का मनोहर आरम्भ हुआ। हिन्दी की शब्द प्रशस्ति को विस्तार देते हुए डालिम्स सनबीम स्कूल गांधी नगर की कक्षा तीन के छात्रों ने बाबा कबीर के दोहों का स्वरपाठ किया. देश में हिन्दी के प्रतिष्ठित कवि और नामी-गिरामी प्रशासनिक अधिकारी रहे नरेश सक्सेना की कविता ‘पेड़’ का पाठ कक्षा आठ की छात्रा दिव्यांशी कुशवाहा, कक्षा दो के छात्र संस्कार सिंह ने हिन्दी के सातत्य को रेखांकित करते हुए कविता का पाठ, कक्षा आठ की छात्रा सुधा कुशवाहा ने हिन्दी की प्रासंगिकता पर शब्द विश्लेषण, ममता कुशवाहा ने हिन्दी की कुशाग्रता पर कविता तथा कक्षा सात अ और ब के छात्रों के समूह ने हिन्दी की व्याकरणिक अनुशंसा के उत्क्रम में संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया विशेषण आदि की परिभाषिक और उदाहरणार्थ भंगिमाओं का रोचक और अभिव्यंजक प्रकटन किया। हिन्दी दिवस समारोह का बीज वक्तव्य देते हुए डालिम्स सनबीम स्कूल गांधी नगर के हिन्दी शिक्षक तौसीफ़ अहमद ख़ान ने कहा कि हिन्दी का कौशल बोध की सिंचाई की भाषा है. भाषा के रूप में हिन्दी ऐसी ज़िंदगी है, जिससे आप अपनी बहुभाषिक दुनिया की व्याख्या करते हैं. भाषा पर आजकल विचार करने का चलन ख़त्म हो चुका है. भाषा जैसे किन्हीं पुराने दिनों की चीज़ हो चुकी है, जिसे हम जानते हैं और जिसका ठीक उसी तरह इस्तेमाल कर सकते हैं जैसे चाकू का, फल का या किसी और चीज़ का करते हैं. जबकि भाषा रोज़ हमारे भीतर बनती है और हमें भी बनाती है. फल या चाकू भी किसी लेखक के हाथ में अलग अर्थ ग्रहण कर लेते हैं. भाषा हमारा भेद खोल देती है कि हम किस तरह के मनुष्य या समाज हैं. लेखक और शिक्षक तौसीफ़ अहमद ख़ान ने हिन्दी के संस्कार को मनुष्य के भीतर की भाषा उर्फ़ ज़बान का सच्चा कल्पक बताया। डालिम्स सनबीम स्कूल गांधी नगर की संस्कृत शिक्षक सीमा तिवारी ने अपने उद्बोधन का आधार वाल्मीकि रामायण के महत्तर श्लोक ‘जननी जन्म भूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी’ को अपने शब्द विवेचन की अवधारणा बताते हुए कहा कि भाषा से प्रेम करने में मुश्किल है, परन्तु भाषा का प्रवाह हमें समृद्ध कर प्रयोग के अवलोकन तक ले जाता है. मुश्किल बस इतनी है कि जब भाषा के प्रति हमारी कृतज्ञता अनुपस्थित होकर ठहर जाती है, तो हम सड़ने लगते हैं, वस्तुतः हम विचार करना छोड़ देते हैं, तो भाषिक विचार भी हमें छोड़ता चला जाता है. इसीलिए भाषा से स्वयं के स्व को बनाने की आशा मनुष्य में जीवनपर्यंत बनी रहनी चाहिए। हिन्दी उत्सव समारोह के सांस्कृतिक स्पंदन और उत्तरीय को अपनी गीतिका से स्वर रंग देने के लिए डालिम्स सनबीम स्कूल गांधी नगर की मेधावी छात्रा रीवा गुप्ता ने वर्णमाला के लावण्य और सौरम्य स्वर के रसायन से सृजित गीत को अपनी आवाज़ का पाथेय दिया, तो इस स्वर को डालिम्स सनबीम स्कूल गांधी नगर के सुसज्जित सभागार में उपस्थित छात्र-छात्राओं का संगमन अपनी प्रशस्ति की बौद्धिकी का उपनाम देकर भाव-विभोर हो उठा. तत्पश्चात अंशिका यादव की हिन्दी कविता और आशीष पाठक के काव्य सौन्दर्य दर्शन की शब्दाभिलाषा ने डालिम्स सनबीम स्कूल गांधी नगर की शैक्षिक और रचनात्मक संस्कृति को अपनी स्मृतिक समृद्धि दी। समारोह के समादरणीय मुख्य अतिथि और वयोवृद्ध शिक्षक अवधेश नारायण राय ने अपने विचार निवेश में सघनतम् कहा कि हिन्दी भाषा को जब हम खोजना बंद कर देते हैं, तो हिन्दी भी हमें बनाना बंद कर देती है. हम बस लगातार यांत्रिक मनुष्य होते जाते हैं. इस यांत्रिक मनुष्य के लिए भाषा भी बस यंत्र जैसी रह जाती है. कहीं वह दबदबे के काम आती है, कहीं दिखावे के, कहीं वह ताकत का औजार बन जाती है, तो कहीं सौदे और कभी-कभी भयादोहन तक के सामान में बदल जाती है. फिर धीरे-धीरे शब्द खोखले होते जाते हैं, अपने अर्थ खोने लगते हैं. जब किसी की भाषा सड़क छाप होती जाती है, तब सड़क छाप कुछ भी बोले, हम भरोसा करने को तैयार नहीं होते. चूंकि हमारे पास हमारा निर्माण करने वाली भाषा नहीं बचती, लेकिन भीतर कोई आवेग बचा रहता है. भाषा अक्षरों, शब्दों और वाक्यों से नहीं बनती, वह हमारे भीतर की उथल-पुथल से बनती है- हमारे प्रेम से, हमारी करुणा से, हमारी छटपटाहट से, हमारे गुस्से से- लेकिन यह भाषा हम भूलते जा रहे हैं, क्योंकि न हमारी भाषा उर्फ़ ज़बान में न वास्तविक प्रेम बचा है न वैध गुस्सा. हम सबको यह याद रखना ज़रूरी है कि भाषा हमारे मनुष्य होने की बुनियादी शर्तों में से एक है. अपने मुख्य अतिथ्य में अवधेय प्राचार्य अवधेश नारायण राय ने हिन्दी भाषा के अनन्य छात्रों को सूचित शब्द में अनेकानेक उपसर्गों और प्रत्ययों से सचेतन देते हुए सचेतक की भूमिका के रूप में भारत का सच्चा नागरिक बनने की प्रक्रिया का अद्वितीय संहिता प्रस्तुत की। हिन्दी उत्सव की अध्यक्षता करते हुए डालिम्स सनबीम स्कूल गांधी नगर के सद्वृत्त निदेशक हर्ष राय ने अपने शब्द सरोकार को बौद्धिक संपदा का विवेकी आधान देते हुए कहा कि यथार्थ सत्य है कि हिंदी का विस्तार इन दिनों हिंदी प्रेमियों को पुलकित और मुदित कर रहा है. कृत्रिम मेधा से जुड़े चैट जीपीटी या गूगल जेमिनी जैसे जो ऐप आ रहे हैं, वे सब हिंदी में जानकारी दे रहे हैं, गूगल हिंदी में सूचनाएं दे रहा है, इंटरनेट पर हिंदी का प्रसार बढ़ रहा है, हॉलीवुड की फ़िल्में हिंदी में डब हो रही हैं, बॉलीवुड की हिंदी फिल्में सात समंदर पार झंडे गाड़ रही हैं, दुनिया के पांचों महादेशों में हिंदी बोलने वाले लोग और लिखने वाले लेखक मिल जाते हैं. दुनिया के कई नामचीन विश्वविद्यालयों में हिंदी विभाग खुल रहे हैं और हिंदी के समृद्ध लेखकों पर काम हो रहा है. अब तो अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया तक में ऐसी संस्थाएं सक्रिय हैं जहां से हिंदी पर केंद्रित नियमित आयोजन होते हैं. सूचना प्रौद्योगिकी और कृत्रिम मेधा से जुड़ी कंपनियां लगातार हिंदी पर काम कर रही हैं. तकनीक की दुनिया में हिंदी के लिए बहुत तन्मयता और गंभीरता से काम कर रहे विशेषज्ञ हिन्दी को सम्मान की बिंदी बना रहे हैं. उन्होंने गर्व से व्यक्त किया कि जिस तहसील में डालिम्स सनबीम स्कूल गांधी नगर अवस्थित है, उसी मोहम्मदाबाद तहसील क्षेत्र में स्थित गोड़उर गांव की मिट्टी में जन्मी हिन्दी की महत्वपूर्ण लेखिका और संस्मरणकार गीतांजलि श्री को उनके उपन्यास पर इंटरनेशनल बुकर मिला. वस्तुतः हिंदी के जिस विस्तार पर हम ख़ुश हैं, वह एक बोली और भाषा के रूप में हमें मर्यादित करती है. निदेशक हर्ष राय ने विस्तृत कहा कि भारत और भारतीय को सदैव हिन्दी की सदाशयी निर्मिति के साथ खड़ा होना होगा. साठ करोड़ लोग जब एक आवाज़ में हिन्दी बोलेंगे और बाक़ी भारतीय भाषाओं के साथ मेल-मिलाप की शब्दावली विकसित करेंगे तो हिंदी का असली और सौष्ठव भरा रूप निखरेगा जिस पर हम गुमान कर सकेंगे. हिंदी का विस्तार सुखद है, लेकिन इस विस्तार को गहराई भी चाहिए। हिन्दी उत्सव समारोह का चैतन्य संचालन कक्षा आठ की मेधाविनी छात्रा द्वय दीप्ति सिंह, अक्षिता वर्मा ने किया. हिन्दी उत्सव का अभिकल्पन डालिम्स सनबीम स्कूल गांधी नगर की प्रधानाचार्या डॉ. प्रेरणा राय और संयोजन गतिविधि प्रभारी नेहा राय द्वितीय ने किया।

Ghazipur Khabar जोड़े आपको ग़ाज़ीपुर से..