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कृषि विज्ञान केंद्र आंकुशपुर गाजीपुर: समय रहते करे बैंगन की फसल में फल एवं तना छेदक कीट का प्रबंधन

गाजीपुर। बैंगन पूरे भारत में उगाई जाने वाली एक प्रमुख फसल है। इसकी खेती से किसान हर महीने अच्छा मुनाफा प्राप्त करता है। लेकिन अकसर किसानों को बैंगन की फसल में कई प्रकार के कीटों के आक्रमण का खतरा रहता है जिससे फसल के उत्पादन में कमी आती है और किसानों को अपनी फसल से अच्छा मुनाफा भी नहीं मिलता है। बैंगन की फसल में फल एवं तना छेदक कीट एक प्रमुख समस्या है, और एक अनुमान के अनुसार बैंगन की फसल में कम से कम 30-40% का नुकसान होता है।  इसका समय रहते उचित प्रबंधन ना करने से बैगन के किसानों की उपज में भारी नुकसान हो सकता है। इस कीट से बचाव के लिए कृषि विज्ञान केंद्र अंकुशपुर के उद्यान वैज्ञानिक डॉ शशांक सिंह ने बताया कि आरंभिक चरणों में, कीटों के लार्वा तने में छेद कर देते हैं जिससे विकास का बिन्दु मर जाता है। मुर्झाये, झुके हुए तने का दिखाई देना इस कीट के प्रकोप का प्रमुख लक्षण है। बाद में लार्वा फल में छेद कर देते हैं जिससे वह खपत के लिए अयोग्य हो जाता है। डॉ सिंह ने बताया कि किसान भाइयों को इस हानिकारक कीट के नियंत्रण के लिए एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) रणनीतियों को अपनाना चाहिए, जिसमें सांस्कृतिक, जैविक और रासायनिक नियंत्रण शामिल हैं । सांस्कृतिक नियंत्रण के अंतर्गत किसान भाई जिन बैगन के फलों एवं पौधों मे कीट का अधिक प्रकोप है उन्हे तोड़/उखाड़कर खेत से दूर गड्ढों में दबा दे। खेत को खरपतवारों से मुक्त रखें एवं फसल अवशेषों को नष्ट कर दें। किसान भाई बैंगन की रोपाई जून के चौथे सप्ताह तक कर दें। साप्ताहिक अंतराल पर पौधों का निरीक्षण करें एवं प्रभावित भागों को हटाकर नष्ट कर दें। इसके साथ ही किसान भाई कीट के जीवन चक्र को बाधित करने के लिए एक ही खेत में बैंगन की लगातार फसल लेने से बचें तथा फसल चक्रण को अपनाये। नर पतंगों को आकर्षित करने और फंसाने के लिए 10 मीटर के अंतराल पर प्रति एकड़ 5-6 फेरोमोन ट्रैप का उपयोग करें, यह कीटों को आकर्षित करके उन्हें पकड़ने में मदद करता है। वयस्क पतंगों को आकर्षित करने और मारने के लिए प्रकाश जाल का प्रयोग करें। बैंगन की किस्मों जैसे पूसा पर्पल राउंड, अर्का कुसुमाकर, ढोली 5, पूसा पर्पल लॉन्ग, पंत सम्राट, एस.एम. 67 एवं 68 का उपयोग करें, जो कि बोरर के प्रति प्रतिरोधक क्षमता प्रदर्शित करते हैं। गेंदा जैसे कुछ पौधों के साथ अंतरफसलीकरण से कीट प्रबंधन में मदद मिल सकती है। जैविक नियंत्रण के अंतर्गत किसान भाई मकड़ियों, कोक्सीनेलिडों और सिरफिड मक्खियों जैसे प्राकृतिक शत्रुओं को संरक्षित और प्रोत्साहित करें, जो कीटों का शिकार करते हैं। परजीवी की गतिविधियों पर ध्यान दें और शुरूआत में वानस्पतिक कीटनाशकों का उपयोग करें। ट्राइकोग्रामा चिलोनिस प्रजाति के ट्राइकोकार्ड 2 से 3 प्रति एकड़ लगाएं। जैविक कीटनाशी बैसिलस थुरिंजिएंसिस (बीटी) जैसे कीटनाशकों का पाउडर 1 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर 500 लीटर पानी की दर से दो से तीन छिड़काव कर नियंत्रण किया जा सकता है। नीम आधारित उत्पादों जैसे नीम तेल और नीम बीज गिरी अर्क (एनएसकेई) 4-5 प्रतिशत का घोल बनाकर 3-4 छिड़काव करना चाहिए। उपर्युक्त क्रियो को करने से यदि नियंत्रण न हो पा रहा हो तो रासायनिक कीटनाशी जैसे कार्बोसल्फान 20 20% ई.सी. 2 मिली प्रति लीटर पानी या कार्टप हाइड्रोक्लोराइड 50% एस.पी. 1 ग्राम प्रति लीटर पानी या फ्लुबेंडियामाइड 20% डब्ल्यू.जी. 1 ग्राम प्रति 2 लीटर पानी या थायोडिकार्ब 75% डब्ल्यू.पी. 1 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें। इसके अलावा किसान भाई एमामेक्टिन बेंजोएट 5% एस.जी.  80 ग्राम प्रति 200 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव कर कीट का नियंत्रण कर सकते है। फूल निकलने के समय 15 लीटर पानी में 7 से 8 मिलीलीटर कोराजेन 18.5% एस.सी. मिलाकर छिड़काव करें। इसके अलावा किसान भाई पौधों को कीटों से बचाने के लिए, रोपाई से पहले, पौधों की निचली जड़ों को 1 मिली/लीटर इमिडाक्लोप्रिड घोल में 3 घंटे के लिए डुबोकर रखें। हर हफ़्ते बाहरी टहनियों को काटने का काम करें। फलों के आने के बाद कीटनाशकों के प्रयोग से बचें। यदि फलों के आने के बाद कीटनाशकों का प्रयोग कर रहे हैं, तो दवाओं के छिड़काव के 5-6 दिन बाद तक फलों की तुड़ाई न करें। रसायनों का छिड़काव सायंकाल में हवा की दिशा में करें।

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