शिवकुमार
गाजीपुर। नगरपालिका गाजीपुर के स्वकर निर्धारण में अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी के बीच महाभारत चरम पर है। इस महाभारत में गाजीपुर नगर की जनता और व्यापारियों को स्वकर का सीधा लाभ पहुंचा है। जिससे गाजीपुर की जनता ईओ और प्रशासन की जय-जयकार कर रही है। वहीं अध्यक्ष का खेमा नाराज है और कहा कि बोर्ड की अनदेखी कर स्वकर निर्धारण की प्रक्रिया ही पूरी गलत है और अंतिम प्रकाशन नही किया जा सकता है इसके लिए वह विधिक राय ले रहें हैं। इसमे बहुमत के सभासदों को भी दरकिनार किया गया है। अध्यक्ष और ईओ की लड़ाई के बीच समाजसेवी विवेक सिंह शम्मी ने यह दावा किया है कि 12 साल से चली आ रही हमारी लड़ाई रंग लायी और जनता हित में स्वकर कम हो गया है। हमारी जीत हुई है। गाजीपुर के नगरवासी इस निर्णय से काफी खुश हैं। अधिशासी अधिकारी अमिता वरुण ने स्वकर निर्धारण का अंतिम प्रकाशन बुद्धवार को कर दिया है। जिसमे 9 मीटर चौड़े सड़क पर स्थित भवन पर स्वकर का निर्धारण 30 पैसे प्रति वर्ग फीट निर्धारित किया गया है। जो पहले के स्वकर से 15 पैसा प्रति स्क्वायर फीट कम हुआ है। इस संदर्भ में अधिशासी अधिकारी अमिता वरुण ने पूर्वांचल न्यूज डाट काम को बताया कि स्वकर का निर्धारण शासन के द्वारा जारी शासनादेश के मानक को पूरी तरह से पूरा किया गया है। हमने पहले बोर्ड को सूचना दिया था इसके बाद शासन के द्वारा निर्धारित समय अवधि के अंदर इस पूरी प्रक्रिया को पूरा करना था और शासनादेश में स्वकर निर्धारण प्रक्रिया की पूरी जिम्मेदारी अधिशासी अधिकारी को सौंपी हुई है। इसी शासनादेश के आधार पर हमने आपत्ति मांगी थी जिस पर 21, 22 व 24 को आपत्तिकर्ताओं को बुलाकर सभी आपत्तियों को निस्तारण कराकर हस्ताक्षर करा लिया गया और 26 मार्च को अंमित प्रकाशन कर दिया गया है। पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और शासन के मंशा के अनुरुप हुई है। इस पूरी प्रक्रिया में अजय राय दारा, सुशील वर्मा, सोमेश मोहन राय, शहबान अली, सनी चौरसिया, ऊषा जायसवाल सभासदगणों ने भरपूर सहयोग दिया। ईओ और अध्यक्ष के महाभारत में स्वकर निर्धारण में जनता को लाभ मिला है जिसकी चर्चा जोरों पर है कि भाजपा में गुटबाजी के चलते इसका श्रेय अध्यक्ष नहीं ले पायीं।