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श्री रुद्राम्बिका महायज्ञ में भगवान श्रीराम की बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन, कथा सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु

गाजीपुर। जनपद के सेवराई तहसील अंतर्गत नौली क्षेत्र स्थित श्री रुद्राम्बिका धाम परिसर में आयोजित श्री रुद्राम्बिका महायज्ञ एवं श्रीराम कथा के क्रम में भगवान श्रीराम के जन्म और उनकी मनमोहक बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया गया। परम पूज्य श्री लक्ष्मी प्रपन्न जीयर स्वामी जी महाराज के कृपापात्र कथावाचक श्री विजय कौशिक जी महाराज ने अपनी ओजस्वी एवं भक्तिमय वाणी से श्रद्धालुओं को प्रभु श्रीराम के बाल स्वरूप की दिव्य लीलाओं का रसपान कराया। श्रीराम जन्म के प्रसंग का वर्णन करते हुए कथावाचक श्री विजय कौशिक जी महाराज ने भगवान श्रीराम के प्राकट्य की महिमा, अयोध्या में छाए उल्लास और राजा दशरथ के परिवार में छाई खुशियों के प्रसंगों को भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया। इसके साथ ही उन्होंने प्रभु श्रीराम की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए बताया कि भगवान का बाल स्वरूप भक्तों के हृदय में प्रेम, श्रद्धा और वात्सल्य का भाव जागृत करता है। कथा के दौरान भगवान श्रीराम की बाल सुलभ चंचलता, भाइयों के साथ उनके स्नेहपूर्ण संबंध और उनके दिव्य व्यक्तित्व से जुड़े प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। पंडाल में मौजूद सैकड़ों श्रद्धालु पूरी तन्मयता के साथ कथा का श्रवण करते रहे और भक्ति के आनंद में डूबे नजर आए। कथा स्थल पर भक्तिमय वातावरण बना रहा। भगवान श्रीराम की बाल लीलाओं के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कथावाचक श्री विजय कौशिक जी महाराज ने बताया कि प्रभु श्रीराम का जीवन केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि मानव जीवन के लिए आदर्शों और संस्कारों की प्रेरणा भी है। भगवान के बाल स्वरूप का स्मरण मन में प्रेम, सरलता, करुणा और भक्ति के भाव जागृत करता है। श्रीराम कथा का श्रवण तभी सार्थक होता है, जब व्यक्ति भगवान के आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करे। महायज्ञ में यज्ञाचार्य डॉ. धनंजय पांडेय के आचार्यत्व में वैदिक परंपराओं के अनुसार धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हो रहे हैं। यज्ञ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने यज्ञ को भारतीय सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक साधना और लोककल्याण की भावना से जुड़ी पवित्र परंपरा बताया। यज्ञ का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से अनुशासन, समर्पण, सद्भाव और समाज के कल्याण का संदेश भी मिलता है। श्री रुद्राम्बिका धाम परिसर में आयोजित महायज्ञ एवं श्रीराम कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति और संस्कारों से जुड़ने का अवसर मिल रहा है। भगवान श्रीराम के जन्म और बाल लीलाओं के प्रसंग ने उपस्थित श्रद्धालुओं के मन में भक्ति और आनंद का संचार किया।

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