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मुहम्‍मदाबाद विधानसभा चुनाव 2027 में अतुल राय का नाम आने से सपा और भाजपा खेमे में बेचैनी

शिवकुमार

गाजीपुर। जिले के सबसे चर्चित सीट मुहम्‍मदाबाद विधानसभा में बसपा खेमे से पूर्व सांसद अतुल राय का नाम आने पर भाजपा और सपा में बेचैनी है। मुहम्‍मदाबाद विधानसभा में कुल 4 लाख 24 हजार 837 मतदाता हैं। जिसमे से 2 लाख 46 हजार 254 मतदाताओं ने 2022 के विधानसभा चुनाव में मतदान किया था। भूमिहार बाहुल्‍य विधानसभा में करीब सवा लाख भूमिहार मतदाता हैं। दूसरे नम्‍बर पर दलित 80 हजार, तीसरे नम्‍बर पर यादव 60 हजार मतदात हैं। इसके बाद कुशवाहा, राजभर, बिंद, मल्‍लाह, और मुसलमान मतदाताओं की संख्‍या इतनी है कि जो किसी भी परिणाम को बदल सकता है। अति पिछड़ा मतदाता ही मुहम्‍मदाबाद का निर्णायक मतदाता होता है। मुहम्‍मदाबाद विधानसभा में 1957 से 1962 तक सीपीआई से सरजू पांडेय विधायक निर्वाचित हुए। 1962 से लेकर 1974 तक कांग्रेस पार्टी से विजय शंकर सिंह निर्वाचित हुए। 1974 में बीकेडी से राम जनम राय विधायक बने। 1980 में एक बार फिर विजय शंकर सिंह कांग्रेस पार्टी के टिकट पर विधायक निर्वाचित हुए। 1985 से लेकर 2002 तक सीपीआई और सपा के टिकट पर अफजाल अंसारी विधायक निर्वाचित होते रहे। 2002 में भाजपा का खाता खुला, कृष्‍णानंद राय ने मुहम्‍मदाबाद विधानसभा में भगवा लहराया और विधायक निर्वाचित हुए। विधायक कृष्‍णानंद राय के निधन के बाद उपचुनाव 2006 में भाजपा प्रत्‍याशी अलका राय विजयी हुईं। 2007 के विधानसभा में सपा प्रत्‍याशी सिबगतुल्‍लाह अंसारी विधायक निर्वाचित हुए। 2012 के विधानसभा चुनाव में कौमी एकता दल के टिकट पर सिबगतुल्‍लाह अंसारी दूसरी बार विधायक बने। 2017 में अलका राय भाजपा के टिकट पर दूसरी बार विधायक निर्वाचित हुईं। 2022 के विधानसभा में समाजवादी पार्टी के टिकट पर मन्‍नू अंसारी विजयी हुए। सियासी गलियारों में चर्चा है कि अतुल राय के आने से मुहम्‍मदाबाद विधानसभा में युवा काफी उत्‍साहित हैं और अतुल राय बसपा के वोटबैंक को हर कीमत पर लुटने से बचा लेंगे। इनकी पारिवारिक पृष्‍ठभूमि का इतिहास काफी समृद्ध है जिसके वजह से मोस्‍ट बैकवर्ड के मतदाताओं में भी इनकी काफी हिस्‍सेदारी रहेगी जिसके चलते वह अच्‍छी लड़ाई खड़ी कर सकते हैं। इसी समीकरण को देखते हुए भाजपा और सपा के रणनीतिकार और बड़े नेता लगातार क्षेत्र में चक्रमण कर रहे हैं और अपनी सियासी गोटी को साधने में लगे हुए हैं। अब देखना है कि अतुल राय अपने सियासी चाल से फाटक की सियासत पर ब्रेक लगा सकते हैं या नहीं यह आने वाला समय बतायेगा।

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