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भारत देश का नामकरण करने वाले चक्रवर्ती सम्राट भरत की जन्मभूमि कण्‍व ऋषि आश्रम करंडा आज भी है उपेक्षित

शिवकुमार

गाजीपुर। गाजीपुर जनपद प्राचीन काल से ही ऋषियों, तपस्वियों और वीरों की धरती रही है। जिले करंडा ब्‍लाक में कण्‍व ऋषि के आश्रम में महान चक्रवर्ती सम्राट भरत का जन्‍म हुआ था। आगे चलकर चक्रवर्ती सम्राट भरत के नाम पर ही देश का नाम भारत पड़ा लेकिन महान चक्रवर्ती सम्राट भरत और कण्‍व ऋषि को वह पहचान नही मिल पायी जो वास्‍तविक में मिलनी चाहिये। कुछ इतिहासकारों के कूटनीति के चलते इस जगह की पहचान पूरे देश में नही बन पायी है। अब सनातन के अनुयायियों की सरकार है। कर्मकांडी विद्वान दिनेश मिश्रा उर्फ बच्‍चा मिश्रा ने सीएम योगी से मांग किया है कि कण्‍व ऋषि के आश्रम व भरत के जन्‍म स्‍थलीय को पर्यटक स्‍थल घोषित कर देश में पहचान दिलायें। बच्‍चा मिश्रा ने बताया कि प्राचीन काल में इसी आश्रम के बगल से ही गंगा प्रवाहित होती थीं। कण्‍व ऋषि के आश्रम में विश्‍वामित्र और मेनका की संतान शकुंतला का पालन पोषण हुआ था। शकुंतला बहुत ही संस्‍कारी और अति सुंदर युवती थीं। एक बार हस्तिनापुर के पुरुवंशी राजा इलिल के पुत्र दुष्‍यंत शिकार खेलने के लिए वन में गये। भूख-प्‍यास से व्‍याकुल दुष्‍यंत कण्‍व ऋषि के आश्रम पहुंचे। उन्‍होने शकुंतला को देखा और मोहित हो गये। महाराजा दुष्‍यंत ने कण्‍व ऋषि के आज्ञा से शकुंतला से विवाह किया। इसके बाद किसी आवश्‍यक कार्य से तुरंत हस्तिनापुर लौट आये। उन्‍होने अपनी निशानी के तौर पर शकुंतला को अंगुठी दी थी। कहा था कि अंगुठी राज निशानी है। कालांतर में महाराजा दुष्‍यंत राजपाठ में कार्य में लग गये। इधर कण्‍व ऋषि के आश्रम में गर्भवती शकुंतला चिंतित रहने लगी। तभी दुर्वाशा ऋषि आश्रम में आये और आवाज दी जिसे शकुंतला नही सुन पायी। इस पर दुर्वाशा ऋषि ने उन्‍हे श्राप दिया कि जिसे वह याद कर रही है वह उन्‍हे भूल जायेगा। कण्‍व ऋषि ने शकुंतला को अपने शिष्‍यों के साथ राजा दुष्‍यंत के पास भेजा। लेकिन श्राप के कारण वह शकुंतला को पहचान नही पाये। अपमानित शकुंतला आश्रम लौट आयी और यहीं पर भरत का जन्‍म हुआ। भरत वीर बालक था। उसके पराक्रम की चर्चा चारो तरफ हो रही थी तभी दुष्‍यंत भरत द्वारा शेर के दांतों को गिनते हुए देखकर आश्‍चर्यचकित हुए। तब कण्‍व ऋषि ने बताया कि यह तुम्‍हारा ही पुत्र है और अंगुठी दिखायी। जिसपर महाराजा दुष्‍यंत प्राश्‍चित करते हुए भरत को अपनाया। कालांतर में भरत देश के चक्रवर्ती सम्राट बने। उन्‍ही के नाम पर हमारे देश का नाम भारत पड़ा। इस संदर्भ में गाजीपुर प्रेस क्‍लब के सचिव और वरिष्‍ठ पत्रकार वि‍नीत दुबे ने पूर्वांचल न्‍यूज डाट काम को बताया कि इतिहास और भौगौलिक परिस्थितियां आज भी प्रमाणित करती है कि चक्रवर्ती सम्राट भरत का जन्‍म करंडा के कण्‍व ऋषि के आश्रम में हुआ था।

 

 

 

 

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