गाजीपुर। पुलिस लाइन गाजीपुर सभागार कक्ष में पुलिस अधीक्षक द्वारा प्रशिक्षुओं को विधि चिकित्सा शास्त्र (फॉरेंसिक मेडिसिन) के बारे में विस्तारपूर्वक पढाया गया तथा प्रशिक्षुओं द्वारा पूछे गए उनके प्रश्नों का जवाब भी दिया गयाl पुलिस अधीक्षक द्वारा मुख्य विषय विधि चिकित्सा शास्त्र (फोरेन्सिक मेडिसिन) था, जिसके बिन्दु 4 में “चोटों के प्रकार” पर विस्तृत चर्चा की गई।
प्रमुख विषय वस्तु: चोटों के प्रकार
प्रशिक्षण के दौरान निम्नलिखित प्रकार की चोटों और उनसे जुड़े विधि-चिकित्सा (मेडिको-लीगल) पहलुओं पर गहन जानकारी प्रदान की गई:
आम्नेयास्त्र (Firearm Injuries):
.गोली लगने से होने वाली चोटें (प्रवेश और निकास घाव)।
.फायरिंग की दूरी और हथियार के प्रकार के आधार पर चोटों की पहचान।
.तीव्र धारदार अथवा नुकीले हथियार (Sharp-edged or Pointed Weapon Injuries):
.कटने के घाव (Incised Wounds): ब्लेड या चाकू जैसी धारदार वस्तु से।
.छेदने के घाव (Stab/Puncture Wounds): सुई या खंजर जैसे नुकीले हथियार से।
.बाइट मार्क (Bite Mark):
.मानव या जानवर के काटने से बने निशान।
.फोरेंसिक दंत विज्ञान (Forensic Odontology) में इनकी भूमिका और पहचान प्रक्रिया।
विस्फोट (Explosion Injuries):
.बम या अन्य विस्फोटक पदार्थों से होने वाली चोटें (विस्फोटक दबाव, छर्रे/टुकड़े)।
दाह (Burn Injuries):
.आग, गर्म वस्तु, या अत्यधिक गर्मी से जलने की चोटें।
.जलने की डिग्री (प्रथम, द्वितीय, तृतीय) और उसकी विधि-चिकित्सा महत्ता।
द्रववाह (Scald Injuries):
.गर्म तरल पदार्थ जैसे पानी या तेल से जलने वाली चोटें।
यन्त्र द्वारा (Crush or Machine Injuries):
.भारी मशीनों, वाहनों, या किसी भी यांत्रिक बल के कारण कुचलने से होने वाली चोटें।
पुलिस अधीक्षक द्वारा सभी प्रशिक्षुओं को इन महत्वपूर्ण फोरेंसिक पहलुओं को लगन और गंभीरता से सीखने का निर्देश दिया ताकि वे भविष्य में प्रभावी पुलिसिंग सुनिश्चित कर सकें।
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