गाजीपुर। जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार ने बताया है कि रबी सीजन की फसलों की बेहतर पैदावार और मृदा स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए कृषक भाई संतुलित उर्वरक उपयोग करे। कृषक अपने गेहूं, सरसों, मसूर, आलू, चना, मटर समेत रबी की अन्य फसलों में टीएसपी, एनपीके 20-20-0-13, एनपीके 12-32-16 तथा नैनो डीएपी का उपयोग अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है। ट्रिपल सुपर फास्फेट टीएसपी में डीएपी की तरह 46 प्रतिशत फास्फोरस उपलब्ध होता है। एक बोरी टीएसपी में 20 किलो यूरिया मिलाने पर यह डीएपी के समान प्रभाव देती है। जनपद में वर्तमान समय पर 8823 मै०टन एनपीके व 13362 मै०टन डीएपी, तथा नैनो डीएपी, नैनो यूरिया व पर्याप्त टीएसपी उपलब्ध है, जो किसानों की मांग के अनुरूप पर्याप्त है। कृषक भाई द्वारा मृदा परीक्षण के आधार पर ही उर्वरक का उपयोग किया जाए। उर्वरक की अधिक मात्रा न केवल मिट्टी की गुणवत्ता को खराब करती है बल्कि उत्पादन पर भी नकारात्मक प्रभाव डालती है। जिलाधिकारी अविनाश कुमार द्वारा जनपद के समस्त सहकारी उर्वरक बिक्री केन्द्रों पर 2616 मै०टन डी०ए०पी० का आवंटन किया गया है, जिसका संबंधित विकासखंड के खंड विकास अधिकारी के सत्यापनोपरान्त पी०ओ०एस० मशीन के माध्यम से वितरण कराया जाएगा। जनपद के निजी और सहकारिता क्षेत्र को मिलाकर लगभग 23568 मैट्रिक टन यूरिया, 13362 मैट्रिक टन डीएपी, 8823 मैट्रिक टन एनपीके, 2907 मै०टन एसएसपी तथा 701 मैट्रिक टन पोटाश निजी और सहकारी क्षेत्र के रिटेल और थोक पॉइंट पर उपलब्ध है और आगे भी सप्लाई प्लान के अनुसार आपूर्ति हो रही है। किसान डीएपी का अनावश्यक भंडारण न करने और सब्जी, केला तथा अन्य फसलों में टीएसपी, नैनो डीएपी व नैनो यूरिया उपयोग करने की सलाह दी जाती है। नैनो डीएपी से बीज उपचार करने पर दानेदार डीएपी की आवश्यकता लगभग आधी रह जाती है। किसान भाईयों से अपील है कि फसलों में डीएपी की जगह टीएसपी व एनपीके उर्वरक का प्रयोग करें।
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