गाजीपुर। सत्जीवन का सार है हिंदी,
भारत का श्रृंगार है हिंदी,
गुरुओं की वाणी है हिंदी,
संतों का उद्गार। है हिंदी।
कवि कल्पना का साकार है हिंदी,
अपनापन का व्यापार है हिंदी,
शिक्षक-शिक्षार्थी का व्यवहार है हिंदी,
अखंडता में एकता की भरमार है हिंदी।
आदि कवि का परिवार है हिंदी,
रामायण की साखी ‘ हार ‘ है हिंदी,
जयशंकर की जय जयकार है हिंदी,
भारतेंदु , भूषण , की बहार है हिंदी।
चंद्रशेखर ,भगत का वार है हिंदी,
लक्ष्मी बाई की कटार है हिंदी,
चेतक की मारुत चाल है हिंदी,
वीर राणा की तलवार है हिंदी।
राजाओं का दरबार है हिंदी,
आक्रांताओं का कारागार है हिंदी,
होली ,दीपोत्सव का त्यौहार है हिंदी,
दैनिक जीवन का अखबार है हिंदी।
गंगा की पावन धार है हिंदी,
काशी का तारनहार है हिंदी,
महाकुंभ का संसार है हिंदी,
आर्यावर्त का संस्कार है हिंदी।
कृत – चंद्रसेन तिवारी
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