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साम्प्रदायिक सोच, जातिवाद एवं रूढ़िवादिता के विरोधी थे मुंशीजी –अरूण कुमार श्रीवास्तव

गाजीपुर। अखिल भारतीय कायस्थ महासभा गाजीपुर के तत्वावधान में कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद जी की जयंती पर जिलाध्यक्ष अरूण कुमार श्रीवास्तव की अध्यक्षता में उनके चंदन नगर स्थित आवास पर माल्यार्पण कार्यक्रम एवं विचार गोष्ठी आयोजित हुई। गोष्ठी आरंभ होने के पुर्व महासभा के सभी कार्यकर्ताओं ने मुंशी प्रेमचंद जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर समाज में फैली कुरीतियों एवं कुप्रथाओं के खिलाफ संघर्ष करने का संकल्प लिया। इस अवसर पर आयोजित संगोष्ठी में  अपने विचार व्यक्त करते हुए  बतौर मुख्य वक्ता महासभा के संरक्षक एवं डीएवी इंटर कालेज के पुर्व प्रवक्ता प्रेम कुमार श्रीवास्तव  ने मुंशी जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तृत रूप से प्रकाश डालते हुए कहा कि वह हिंदी और उर्दू के महान लेखकों में से एक थे। मुंशी जी ने हिंदी कहानी एवं उपन्यास की ऐसी परम्परा कायम की जिसने पूरी सदी के साहित्य का मार्गदर्शन किया। प्रेमचंद जी के राजनैतिक एवं सामाजिक जीवन पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय आंदोलन से जुड़ने के बावजूद उनका लेखन कार्य सुचारू रूप से चलता रहा। उनके राजनैतिक संघर्ष उनकी रचनाओं में सामाजिक संघर्ष बनकर सामने आया जिसमें जीवन का यथार्थ और आदर्श दोनों था। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद जी केवल साहित्यकार ही नहीं बल्कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं सामाजिक न्याय की लड़ाई के महान योद्धा थे। उन्होंने अपनी लेखनी से केवल स्वतंत्रता संग्राम को ही धार नहीं दी बल्कि किसानों मजदूरों की दयनीय स्थिति,दलितों के शोषण, नारियों की दुर्दशा के साथ साथ सूदखोरों, पूंजीपतियों, जमींदारों एवं सामंतियो के मनमानी एवं अत्याचार के खिलाफ बेखौफ होकर अपनी कलम चलायी तथा विधवा विवाह की जमकर वकालत की। मुंशी जी आज के राजनैतिक एवं सामाजिक हालात में पूरी तरह से प्रासंगिक है। जिलाध्यक्ष अरूण कुमार श्रीवास्तव ने अपने विचार रखते हुए कहा कि मुंशी जी ने आम आदमी को अपनी रचनाओं का विषय बनाया और उनकी समस्याओं पर खुलकर कलम चलाई। मुंशी जी सामाजिक यथार्थ के सबसे बड़े कथाकार थे। वह वस्तुत: जाति मुक्त, रूढ़ि मुक्त सम्पन्न नये भारत का निर्माण करना चाहते थे। मुंशीजी साम्प्रदायिक सोच के खिलाफ थे। उनकी लेखनी उनके खिलाफ भी खुब चली। उनके जीवन से जनसमस्याओं के खिलाफ संघर्ष करने की प्रेरणा मिलती है। इस संगोष्ठी में मुख्य रूप से चन्द्र प्रकाश श्रीवास्तव, मनीष श्रीवास्तव, अनूप श्रीवास्तव, अश्वनी श्रीवास्तव, विपुल सिन्हा, अमरनाथ श्रीवास्तव,हर्ष, प्रियांशु,आर्यन, मेघा, सुधांशु आदि उपस्थित थे। इस संगोष्ठी का संचालन जिला महामंत्री अरूण सहाय ने किया।

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