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कृषि विज्ञान केंद्र आंकुशपुर गाजीपुर: धान में रोगों के लक्षण एवं निदान

गाजीपुर। धान हमारे देश की प्रमुख खाद्यन्न फसल है और विभिन्न रोग से प्रभावित होने के कारण किसान को अत्यधिक आर्थिक हानि का सामना करना पड़ता है I अत: रोगो  का नियन्त्रण अतिआवश्यक  है I कृषि विज्ञान केंद्र अंIकुशपुर, गाजीपुर के मृदा वैज्ञानिक डॉ0 दीपक प्रजापति ने बताया कि  धान में खैरा रोग जिंक तत्व की कमी से होता है I  पत्तियां पहले नीचे से पीली होने लगती है नई पत्तियों पर भूरे रंग के धब्बे और धारियां विकसित हो जाती है, जो पुरानी पत्तियों को पूरी तरह से ढक लेती हैं और उत्पादन में 25% की कमी के साथ-साथ  लक्षण दो तीन सप्ताह बाद परिलक्षित होता है I इसकी रोकथाम  हेतु जिंक सल्फेट 10 से 12 किलोग्राम प्रति एकड़   मिट्टी में रोपाई /बुवाई के पूर्व छिड़काव करें I भूरा धब्बा – इस रोग में पत्तियों पर गहरी कत्थई रंग के गोल/ अंडे जैसा  धब्बे बन जाते हैं, धब्बों के चारों तरफ पीला घेरा बन जाता है तथा मध्य भाग पीलापन लिए कत्थई  रंग का  हो  जाता है I  इसके  रोकथाम  हेतु मैन्कोजेब  75% ई 0सी0  200 मिली 0  लेकर  200 से 225 लीटर  पानी में घोलकर खड़ी फसल में छिड़काव करें I शीथ ब्लाईट (शाकाणु झुलसा)- पत्र केंचुल  व तनों पर अनियामित आकार के धब्बे बनते हैं, जिनका किनारा गहरा भूरा तथा बीच का भाग हल्के रंग का हो जाता है और पत्तियों पर घेरादार  धब्बे बनते है I वैलिडैमाइसिन1-1.25 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करने से इस बीमारी का निदान हो सकता है Iजीवाणु झुलसा  (बैक्टीरियल ब्लाईट) – पत्तियों नॉक अथवा किनारे से एकदम सुखने लगती हैं, सुखे हुए किनारे पर अनियामित एवम  टेढ़ी मेढ़ी  संरचना बन जाती  हैं I 2 से 3 ग्राम स्ट्रेप्टोमाइसिन सल्फेट 90% +टेट्रासाइक्लिन  हाइड्रोक्लोराइड 10% को 200 ग्राम कॉपर ऑक्सीक्लोराइड पाउडर लेकर 200 से 225 लीटर पानी में घोल  बनIकर प्रति  एकड़  छिड़काव  करने से इस रोग का निदान संभव है I सफेदा रोग-  पौधों में लोहा तत्व की कमी के कारण अधिक प्रभाव पड़ता है I  इसमे पत्तियाँ सफेद रंग की निकलती हैं जो कागज के समान फट जाती है इसके उपचार के लिए दो से तीन किलोग्राम फेरससल्फेट प्रति एकड़  में एक से डेढ़ किलोग्राम बुझे हुए चूने अथवा 8 से 10 किलोग्राम यूरिया के साथ मिलकर छिड़काव  करने से इस रोग के लक्षण समाप्त हो जाएगे Iझोका रोग – इस रोग में पत्तियों पर आंख की आकृति के धब्बे बनते हैं ,जो मध्य में राख के रंग तथा किनारे गहरे कत्थई  रंग के होते हैं, पतियों के अतिरंजित बालियों ,  पुष्प,  शाखाएं एवम गांठों पर काले धब्बे बनते हैं I कंडुवा रोग – इसमे बालियाँ के कुछ दIने पीले, सुनहरे या भूरे रंग के पाउडर में बदल जाते हैं, जो बाद में काले हो जाते हैं I इसके उपचार के लिए कार्बेन्डाजिम  पाउडर  200 ग्राम 200 से 250 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति एकड़ छिड़काव  करें I किसान भाईयों से यह भी आग्रह है कि धान के नर्सरी डालने से पहले बीज का शोधन जरूर करें, इसमे 3 ग्राम थीरम या 2 ग्राम कार्बेन्डाजिम प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचार करें, जिससे बीज जनित, मिट्टी जनित और कवक से होने वाली बीमारी प्रारंभिक चरण में ही नष्ट किया जा सके और धान की उपज में बढ़ोतरी हो सकेI

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