गाजीपुर। सिद्धपीठ हथियाराम मठ के पीठाधीश्वर महामण्डलेश्वर स्वामी भवानी नंदन यति जी महाराज ने पूर्वांचल न्यूज डॉट काम को बताया कि चातुर्मास में केवल शिव की पूजा-अर्चना की जा सकती है। क्योंकि सभी देवता और प्रकृति दोनो ही नीद्रा मे होते है। स्वामी भवानी नंदन यति जी ने बताया कि चातुर्मास चार महीने का होता है,यह गुरू पूर्णिमा से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक चलता है। किंतु शास्त्र ने संसोधन के अनुसार अगर कोई साधु-संत चार महीने एक जगह रहकर पूजा-पाठ करता है तो ऐसे में समाज में धर्म का प्रचार-प्रसार बंद हो जाता है। पूजा-पाठ, धर्म-संस्कार आदि में कोई कमी न आये इसलिए चार महीने का कार्य दो महीने में करने का शास्त्र आदेश देता है। चातुर्मास केवल साधु, सन्यासी और धर्मात्मा आदि करते है, सावन माह वर्षाकाल में ही चातुर्मास होता है क्योकि बरसात के मौसम में बाढ़, भूस्खलन, तुफान, वर्षा आदि का प्रकोप होता है और इन प्राकृति आपदा से बचाव के लिए एक जगह रहकर संत-महात्मा चातुर्मास का आयोजन करते है। उन्होने बताया कि वर्तमान समय में हथियाराम मठ में चर्तुमास का आयोजन हो रहा है और उसमें रूद्राभिषेक कर शिव की पूजा हो रही है। उन्होने बताया कि देव सैनी एकादशी के बाद देवता विश्राम करने चले जाते है, केवल शिव की पूजा होती है क्योंकि शिव घोर भी है अघोर भी है, वह केवल गंगाजल पसंद करते है इसलिए पूरे सावन महीने में शिव का जलाभिषेक होता है। देव उठनी एकादशी से ही देवताओ की पूजा शुरू हो जाती है, देवता और प्रकृति मानव कल्याण में लग जाते है।
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