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आर्थिक रूप से किसानों के लिए लाभकारी है समय-समय पर धान की खेती में खरपतावर प्रबंधन

गाजीपुर। धान की फसल में खरपतवार प्रबंधन के लिए, सबसे पहले, खरपतवारों की पहचान करना महत्वपूर्ण है ताकि सही तरीके से उनका प्रबंधन किया जा सके। इसके बाद, यांत्रिक, रासायनिक और फसल चक्रण जैसी विभिन्न विधियों का उपयोग करके खरपतवारों को नियंत्रित किया जा सकता है। कृषि विज्ञान केंद्र आंकुशपुर गाजीपुर के कृषि वैज्ञानिक डॉ नरेन्द्र प्रताप ने जनपद के कृषक भाइयों को जानकारी देते हुए कहा कि धान के खेतों में विभिन्न प्रकार के खरपतवार उगते हैं, जैसे कि घास, चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार और मोथा । इन खरपतवारों की पहचान करना महत्वपूर्ण है ताकि उनके लिए सही प्रबंधन रणनीति बनाई जा सके । इन प्रबंधनों में सबसे पहले आता है यांत्रिक विधि खरपतवारों पर काबू पाने की यह एक सरल एवं प्रभावी विधि है। सामान्यत: धान की फसल में दो निराई-गुड़ाई, पहली बुवाई/रोपाई के 20-25 दिन बाद एवं दूसरी 40-45 दिन बाद करने से खरपतवारों का प्रभावी नियंत्रण किया जा सकता है तथा फसल की पैदावार में काफी वृद्धि की जा सकती है। रासायनिक विधि जैसे बुवाई/रोपाई के 3-4 दिन बाद ब्यूटाक्लोर (मिचेटी) (1500-2000 ग्राम सक्रिय पदार्थ/हें.) या पेंडीमेथलिन (स्टाम्प) (1000-1500  ग्राम सक्रिय पदार्थ/हें.) घास, मोथा एवं चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार के नियंत्रण हेतु प्रयोग कर सकते है, साथ ही पनोक्स्सलम 1.02% + साईहलोफोप ब्युर्टाइल 5.1% @ 2500 मिली/हे. का प्रयोग बुवाई/रोपाई के 20-25 दिन बाद चौड़ी पत्ती एवं मोथा कुल वाले खरपतवार के नियंत्रण हेतु कारगर होता है तथा फेनाक्जाप्राप इथाईल (व्हिपसुपर) (60-70 ग्राम सक्रिय पदार्थ/हें) सकरी पत्ती वाले खरपतवार विशेषकर संवा के नियंत्रण में प्रभावशाली है  |खरपतवारनाशी रसायनों की आवश्यक मात्रा को 600 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर की दर से समान रूप से छिड़काव करना चाहिए। रोपाई वाले धान में खरपतवारनाशी रसायनों की आवश्यक मात्रा को 60 किग्रा. सूखी रेत में अच्छी तरह से मिलाकर रोपाई के 2-3 दिन के बाद 4-5 सेमी. खड़े पानी में समान रूप से बिखेर देना चाहिए। धान की फसल में मुख्यत: सभी प्रकार के खरपतवार (जैसे घास कुल, मोथा कुल एवं चौड़ी पत्ती वाले) पाये जाते है। इसलिए एक ही शाकनाशी का लगातार प्रयोग करते रहने से कुछ विशेष प्रकार के ही खरपतवारों की रोकथाम हो पाती है तथा दूसरे प्रकार के खरपतवारों की संख्या में लगातार वृद्धि होती रहती है तथा कुछ समय बाद यही दूसरी प्रकार के खरपतवार मुख्य खरपतवार के रूप में उभर आते है। ऐसी परिस्थितियों में विभिन्न प्रकार के शाकनाशियों का मिश्रण करके छिड़काव करने से खरपतवारों का प्रभावी नियंत्रण किया जा सकता है। एक ही फसल को बार-बार एक ही खेत में उगाने से खरपतवारों की समस्या और जटिल हो जाती है। अत: यह आवश्यक है कि पूरे वर्ष भर एक ही खेत में धान-धान-धान लेने के बजाय धान की एक फसल के बाद उसमें दूसरी फसलें जैसे चना, मटर, गेहूं आदि लेने से खरपतवारों को कम किया जा सकता है।

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