शिवकुमार
गाजीपुर। लोकसभा गाजीपुर के उपचुनाव होने की आशा धीरे-धीरे धूमिल होती जा रही है। प्रशासनिक तैयारियां तो हो रही है लेकिन सत्ताधारी पार्टी भाजपा सहित अन्य दलों में उपचुनाव को लेकर कोई भी सरगर्मी नही दिखायी दे रही है। समय बीतता जा रहा है इसलिए राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अब उप चुनाव नही सीधे 2024 में आम चुनाव होगा। सियासी पंडितों का कहना है कि अति पिछड़े और दलितों के वोट बैंक पर भाजपा लगातार 2014 से केंद्र में और प्रदेश में सरकार बना रही है लेकिन गाजीपुर में अति पिछड़ों कुशवाहा, विश्वकर्मा, बिंद, राजभर, चौहान आदि बिरादरी और दलितों को कब हिस्सेदारी मिलेगी इस सवाल का जवाब दोनों समाज के लोग भाजपा के हाईकमान से मांग रहे हैं। गाजीपुर लोकसभा के सामाजिक समीकरण की बात की जाये तो कुशवाहा, राजभर, चौहान और बिंद समाज की बाहुल्यता है। अति पिछड़े समाज ने ईमानदारी के साथ भाजपा के पात में बैठकर भाजपा की केंद्र और प्रदेश में सरकार बनायी। इसके बावजूद भी उचित सम्मान न मिलने पर राजभर समाज ने ओमप्रकाश राजभर के नेतृत्व में 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा का साथ छोड़कर समाजवादी पार्टी के साइकिल पर सवार हो गये जिसके कारण भाजपा जिले की सातों विधानसभा सीट पर हार गयी। अब समय आ गया है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में अति पिछड़ों को हिस्सेदारी सौंपी जाये। जिससे भाजपा का परम्परागत वोट और अति बैकवर्ड का वोट मिलकर अफजाल अंसारी के किले को ध्वस्त कर सके और एक बड़ी विजय हासिल कर सके।
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