Breaking News
Home / ग़ाज़ीपुर / वैदिक मंत्रोच्चार और जयकारों से गूंजा श्री रुद्राम्बिका धाम, यज्ञ मंडप की परिक्रमा को उमड़े सैकड़ों श्रद्धालु

वैदिक मंत्रोच्चार और जयकारों से गूंजा श्री रुद्राम्बिका धाम, यज्ञ मंडप की परिक्रमा को उमड़े सैकड़ों श्रद्धालु

गाजीपुर। जनपद के नवली क्षेत्र स्थित श्री रुद्राम्बिका धाम परिसर में आयोजित श्री रुद्राम्बिका महायज्ञ सह श्रीराम कथा के क्रम में रविवार को प्रातः आठ बजे वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञ-हवन का शुभारंभ हुआ। यज्ञ की आहुतियां प्रारंभ होते ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। देखते ही देखते धाम परिसर में सैकड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ जुट गई। पूरा यज्ञ मंडप काली मइया, गंगा मइया, भगवान शंकर और मां रुद्राम्बिका के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से यज्ञ मंडप की परिक्रमा कर सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति के लिए मां रुद्राम्बिका से प्रार्थना की। यज्ञ का संचालन यज्ञाचार्य डॉ. धनंजय पांडेय ने किया। इस अवसर पर यज्ञ की महिमा पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि प्रक्रिया की दृष्टि से यज्ञ मनोवैज्ञानिक शिक्षण की एक सशक्त विधि है, जिसके माध्यम से मनुष्य के मन पर परोक्ष किंतु स्थायी प्रभाव पड़ता है और उसमें सुसंस्कारों की स्थापना होती है। यज्ञ के प्रत्येक कर्मकांड में मनुष्य को उपयोगी बनाने और जीवन में श्रेष्ठ आचरण अपनाने की प्रेरणा निहित है। यह केवल धार्मिक क्रिया-कृत्य नहीं, बल्कि अंतःकरण में श्रेष्ठ संस्कारों की स्थापना करने वाली एक प्रभावशाली मनोवैज्ञानिक विधि है। उन्होंने यज्ञ के व्यापक स्वरूप की व्याख्या करते हुए कहा कि समुद्र से बादल, बादलों से धरती में आर्द्रता, आर्द्रता से नदियों का प्रवाह और नदियों के माध्यम से पुनः समुद्र की क्षतिपूर्ति का क्रम एक प्राकृतिक चक्र है। इसी प्रकार शरीर के विभिन्न अंग एक-दूसरे की सहायता से जीवन चक्र को संचालित करते हैं। समाज में भी अर्थतंत्र, शासनतंत्र और अन्य व्यवस्थाएं परस्पर सहयोग के आधार पर प्रगति करती हैं। उन्होंने कहा कि यज्ञ परंपरा ही वह आधार है, जिसके कारण जड़ और चेतन दोनों अपना सुव्यवस्थित स्वरूप बनाए रखते हैं। इसी कारण यज्ञ तत्व को विश्व की नाभि और धुरी कहा गया है। डॉ. पांडेय ने कहा कि यज्ञ दर्शन विवादों से परे ऐसा व्यापक दर्शन है, जिसमें व्यक्ति और समाज की उन्नति, शांति तथा सुव्यवस्थित जीवन के लिए आवश्यक सिद्धांत समाहित हैं। यज्ञ हमें त्याग, सहयोग, समर्पण और परोपकार की भावना के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देता है। महायज्ञ में बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने यज्ञ मंडप की परिक्रमा कर विधि-विधान से आहुतियां अर्पित कीं तथा मां रुद्राम्बिका से अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और परिवार की सुख-शांति की कामना की। वहीं, महायज्ञ के क्रम में दोपहर दो बजे से श्रीराम कथा का आयोजन हुआ, जिसमें कथावाचक पंडित विजय कौशिक जी महाराज ने अपने मुखारविंद से भगवान श्रीराम की कथा का रसपान कराया। कथा श्रवण के लिए भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम को सफल बनाने में गोविंद चौरसिया, अखिलेश पांडेय, बबुआ सिंह, जितेंद्र कश्यप, विशेष त्रिपाठी, शैलेंद्र पांडेय, त्रिभुवन तिवारी, अजय पांडेय, श्याम बिहारी यादव, संतोष सिंह, विद्यानंद सिंह, बृजेश पांडेय, हृदयनारायण सिंह, सीताराम पुजारी एवं राम बिहारी सिंह सहित अन्य लोगों का विशेष सहयोग रहा।

[smartslider3 slider="4"]

About admin

Check Also

पीजी कॉलेज गाजीपुर में मनाया गया राष्ट्रीय एकता दिवस

गाजीपुर! पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज, गाजीपुर में 31 अक्टूबर 2026 को 92 यूपी बटालियन एनसीसी, गाजीपुर …