गाजीपुर। अति प्राचीन श्रीरामलीला कमेटी हरिशंकरी के तत्वावधान में बुधवार की शाम लीला के नौवें दिन अर्बन बैंक के निकट राजा शंभूनाथ के बाग स्थित श्रीराम सिंहासन पर जयंत नेत्र भंग, माता अनुसूइया-सीता संवाद, अत्रि-श्रीराम संवाद, विराध राक्षस वध प्रसंग का मंचन किया गया। राजा भैया आदर्श श्रीरामलीला मंडल के कलाकारों ने अपने अभिनय से दर्शकों को भावविभोर कर दिया। लीला का शुभारंभ कमेटी के मंत्री ओमप्रकाश तिवारी ने प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता को माला पहनाकर आरती-पूजन के साथ किया। लीला में दिखाया गया कि वनवास के दौरान प्रभु श्रीराम माता सीता के लिए फूलों से आभूषण बना रहे थे। इसी बीच देवराज इंद्र का पुत्र जयंत कौवे का रूप धारण कर श्रीराम के बल की परीक्षा लेने पहुंचा और माता सीता के चरणों में चोंच मारकर भागने लगा। सीता के चरणों से रक्त बहता देख श्रीराम ने बाण का संधान किया, जिसके भय से जयंत ब्रह्मा और भगवान शिव के पास पहुंचा, लेकिन दोनों ने उसके कृत्य को अनुचित बताते हुए सहायता करने से इनकार कर दिया। अंततः देवर्षि नारद की सलाह पर जयंत श्रीराम की शरण में पहुंचा और क्षमा मांगी। प्रभु ने उसे दंडस्वरूप एक आंख से काना करते हुए क्षमा कर दिया। वन मार्ग में आगे बढ़ते हुए श्रीराम, लक्ष्मण और सीता महर्षि अत्रि के आश्रम पहुंचे। महर्षि ने प्रभु का स्वागत कर स्तुति की और राक्षसों से पृथ्वी को मुक्त कराने के उनके उद्देश्य की पूर्ति का आशीर्वाद दिया। वहीं माता अनुसूइया ने सीता को नारी धर्म और पतिव्रत की महिमा समझाई। उन्होंने पति के प्रति प्रेम, समर्पण और निष्ठा को गृहस्थ जीवन का महत्वपूर्ण धर्म बताया। इसके बाद वन मार्ग में विराध नामक राक्षस ने श्रीराम पर हमला किया, जिसका प्रभु ने वध कर दिया। लीला के दौरान पूरा परिसर ‘जय श्रीराम’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गूंज उठा। इस अवसर पर कमेटी के अध्यक्ष विनय कुमार सिंह, मंत्री ओमप्रकाश तिवारी, उपमंत्री लव कुमार त्रिवेदी, मेला प्रबंधक मनोज कुमार तिवारी, उपमेला प्रबंधक मयंक तिवारी, कोषाध्यक्ष बाबूरोहित अग्रवाल, प्रमोद कुमार गुप्ता, राम सिंह यादव सहित कमेटी के अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
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