गाजीपुर। मोहम्मदाबाद तहसील अंतर्गत करइल क्षेत्र, जिसे अन्न का बखार कहा जाता है, में इस बार मोंथा के हमले ने किसानों की फसलों को तबाह कर दिया है। धान और बाजरे की फसलें तैयार थीं, लेकिन मोंथा ने निवाला छीन लिया। इससे किसानों की कमर टूट गई है और रबी की बुआई लगभग असंभव हो गई है। अब जब फसल बीमा देने की बात आती है, तो लेखपाल अपनी ईमानदारी का ढोंग रचते हुए 50 प्रतिशत से कम नुकसान दिखाकर किसानों का हक छीन लेते हैं। यह एक बड़ा घोटाला है जिसमें अधिकारी और कर्मचारी मिलकर किसानों को लूटते हैं। इस क्षेत्र में ग्रीनफील्ड और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे बनाकर विकास की गंगा बहाने का दावा करने वाली सरकार ने कभी नहीं सोचा कि किसानों का जीवन कैसे चलता है। सड़कें खराब हैं, आधारभूत सुविधाएं नहीं हैं, और मंडी का निर्माण ठंडे बस्ते में चला गया है। किसानों ने मांग की है कि सरकार उनकी समस्याओं का समाधान करे और उन्हें उनका हक दिलाए। उन्होंने यह भी कहा है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। अब देखना यह है कि सरकार किसानों की मांगों पर ध्यान देती है या नहीं। क्या सरकार किसानों की समस्याओं का समाधान करेगी और उन्हें उनका हक दिलाएगी? यह एक बड़ा सवाल है जिसका जवाब जल्द ही मिलना चाहिए।
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