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कथा भक्तों को भक्ति, प्रेम और जीवन के सत्य का देती है सन्देश- आचार्य राम मनोज त्रिपाठी

गाजीपुर। नगसर क्षेत्र में बुधवार को आर पी स्कूल ढढ़नी में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम प्रसंग में कथावाचक आचार्य श्री राम मनोज त्रिपाठी जी ने कई दिव्य घटनाओं का वर्णन किया, सबसे पहले स्यमंतक मणि का प्रसंग का जिक्र किए  जिसमें भगवान श्रीकृष्ण पर झूठा आरोप लगाया जाता है, परंतु अंत में सत्य प्रकट हो ही जाता है और उनका तेज़ और गौरव और बढ़ जाता है। इसके बाद भगवान के अन्य विवाहों का वर्णन किए जिसमें उन्होंने सोलह हजार एक सौ राजकन्याओं से विवाह , जिन्हें नरकासुर ने बंदी बना रखा था। भगवान ने उन्हें मुक्त कर अपने साथ सम्मानपूर्वक विवाह किया, जो उनके करुणा और धर्म की रक्षा का प्रतीक है के बारे में व्याख्यान दिए। इसके पश्चात नारद मोह कथा के बारे बताए जिसमें देवर्षि नारद भी माया में फँसकर भगवान की लीला का अनुभव करते हैं। फिर सुदामा और श्रीकृष्ण की मित्रता का प्रसंग को  झांकी और भजन द्वारा दिखाने का प्रयास किए , जिसमें निर्धन ब्राह्मण सुदामा के प्रति भगवान का प्रेम, सच्ची मित्रता और भक्ति की सर्वोच्चता को दर्शाता है। उद्धव को संदेश देकर भगवान ज्ञान और वैराग्य की शिक्षा देते हैं, और अवधूतोपाख्यान के माध्यम से जगत के रहस्यों का उपदेश देते हैं। अंत में भगवान का अंतिम उपदेश, कल्कि अवतार का वर्णन और प्रलय के कथा के बारे में विस्तार रूप से चर्चा किए। कथा के अंत में कथावाचक आचार्य श्री राम मनोज त्रिपाठी जी ने कहा जिस प्रकार शुकदेव जी के कथा से राजा परीक्षित की मुक्ति हो जाती है उसी प्रकार यह कथा भक्तों को भक्ति, प्रेम और जीवन के सत्य का सन्देश देती है।जिससे सभी भक्तों का कल्याण हो जाता है। आज के कथा में प्रदीप चतुर्वेदी,जयनारायण उपाध्याय,दयाशंकर दुबे,श्रीकांत चौबे,आशुतोष मिश्रा,देवेश तिवारी,जयगोविंद दुबे,पप्पू तिवारी,रणजीत राणा,रमेश व्यास,उपेन्द्र यादव,जयप्रकाश पाण्डेय,रामप्रवेश पाण्डेय सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भगवान के कथा का रसपान किया।

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