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प्राचीन काल से चल रही है रक्षाबंधन पर्व की धार्मिक, पौराणिक कथा

गाजीपुर। भाई-बहन के अटूट प्रेम, स्नेह और विश्वास का पर्व रक्षाबंधन 28 अगस्त शुक्रवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जायेगा।बाजार मे राखी की दुकाने सज गयी हॆ। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर उसके सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करती हैं, वहीं भाई बहन की रक्षा, सम्मान और हर सुख-दुख में साथ निभाने का संकल्प लेने के साथ बहन को उपहार देने की परम्परा हॆ। रक्षाबंधन पर्व को लेकर अनेक कथाएं प्रचलित हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार माता लक्ष्मी ने राजा बलि की कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर उन्हें अपना भाई बनाया था। इसी प्रकार इंद्राणी द्वारा भगवान इंद्र को रक्षासूत्र बांधने का प्रसंग भी मिलता है। इन कथाओं में रक्षासूत्र को सुरक्षा, विश्वास और आत्मीयता का प्रतीक माना गया है। महाभारत काल के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण की उंगली घायल होने पर द्रौपदी ने अपनी साड़ी का टुकड़ा बांधकर उनके घाव को ढका था। द्रौपदी के इस स्नेह और आत्मीयता का मान रखते हुए श्रीकृष्ण ने उनकी रक्षा का संकल्प लिया। चित्तौड़ की रानी कर्णावती ने हुमायूं को राखी भेजने की कथा काफी प्रसिद्ध है। इसी प्रकार सिकंदर की पत्नी द्वारा राजा पुरु को रक्षासूत्र भेजने की कथा भी लोकप्रचलित है। रक्षाबंधन केवल भाई की कलाई पर राखी बांधने का पर्व नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास, सम्मान और एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी निभाने का पवित्र संकल्प है। भाई-बहन के रिश्ते की आत्मीयता और भावनात्मक जुड़ाव आज भी कायम है।

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