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नि:स्‍वार्थ भक्ति से उदय होता है वैष्‍णव- आचार्य मेघदीपानंद अवधूत

गाजीपुर। आनंद मार्ग आश्रम लाल दरवाजा ग़ाज़ीपुर में आनंद मार्ग प्रचारक संघ द्वारा आयोजित प्रथम संभागीय सेमिनार में शनिवार को आनंद मार्ग के वरिष्ठ आचार्य मेघदीपानंद अवधूत ने साधना पर प्रकाश डालते हुए साधना मार्ग के तीन विशेष स्तरों या कर्म की बात कही वे स्तर हैं शाक्त वैष्णव और शैव तीनो का परमार्थिक मूल्य समान है अर्थात किसी एक को संपूर्ण रूप से छांटकर यदि कोई आनंद मार्ग को जानना या समझना चाहिए तो उसमें वह सक्षम नहीं होगा शाक्त साधना मे ही जैव भाव शैव भाव के पथ पर पदयात्रा शुरू करता है इस पदयात्रा में पथिक की अग्रगति मूलत: प्रत्याहार योग में सिद्ध होता है प्रत्याहार योग के माध्यम से सड़क जगत सेवा शुरू करता है वैष्णव स्तर में नि: स्वार्थ भक्ति का उदय होता है और शैव स्तर ज्ञान स्वरूत्व का भाव है प्रत्याहार साधना की चार स्तरों को विस्तार से बतलाते हुए आचार्य जी ने कहा की प्रत्याहार साधना के चार स्तर हैं यतमान व्यतीरेक एकेनिद्रय और वशीकरण यतमान है वृत्ति प्रवाह से अपने को हटा लेने का प्रयास इसमें मानसिक वृत्तीयां चित की ओर उन्मुख होती है और अंत में वशीकार सिद्धि मूलत: भक्ति का भाव है अर्थात गोपी भाव में कृष्ण शरण इस वशीकार मे मन आत्मा के पूर्ण नियंत्रण में रहता है और साधक 50 मूल वृत्तियों पर नियंत्रण पा लेता है।

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