गाजीपुर। जनपद के तहसील सेवराई अंतर्गत खुदरा-पथरा गांव में राम उपाध्याय के द्वार पर 12 से 19 अक्टूबर तक आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का सोमवार को यज्ञ-हवन, प्रसाद वितरण और श्रद्धालुओं की विदाई के साथ समापन हुआ। कथावाचक पंडित राजकुमार तिवारी ने कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को सत्संग, आत्मचिंतन, सदाचार और आध्यात्मिक जीवन का संदेश दिया। वहीं, आयोजक राम कुमार उपाध्याय ने प्रकृति के संरक्षण और उसके अनुकूल जीवनशैली अपनाने पर जोर दिया। खुदरा पथरा गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान प्रतिदिन बड़ी संख्या में माताएं, बहनें, बुजुर्ग और युवा कथा श्रवण के लिए पहुंचे। कथा के चलते गांव सहित आसपास के क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण बना रहा। प्रख्यात कथावाचक एवं विद्वान पंडित राजकुमार तिवारी ने अपने मधुर वचनों और संगीतमय शैली में श्रीमद्भागवत की सरल व्याख्या कर श्रद्धालुओं को धर्म, आध्यात्म और व्यावहारिक जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं से परिचित कराया। कथा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए पंडित राजकुमार तिवारी ने कहा कि ‘कथा श्रवण सत्संग का महत्वपूर्ण अंग है। युवा हों या बुजुर्ग, माताएं हों या बहनें, जब भी श्रीमद्भागवत कथा, श्रीराम कथा, हरिकीर्तन अथवा राम नाम संकीर्तन का अवसर मिले, तो उसके लिए समय अवश्य निकालना चाहिए’। सत्संग और कथा श्रवण से मन की मलीनता दूर करने तथा सद्गुणों को अपनाने की प्रेरणा मिलती है। अच्छे गुणों को अपने आचरण में उतारकर व्यक्ति अपने जीवन को श्रेष्ठ बना सकता है। उन्होंने बदलते सामाजिक परिवेश में आत्मनिरीक्षण की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि जो व्यक्ति स्वयं का आकलन नहीं करता, उसके जीवन में सुधार की संभावनाएं सीमित हो जाती हैं। आत्मचिंतन और परमात्मा के चिंतन से व्यक्ति अपनी कमियों को पहचानने तथा परिस्थितियों का विवेकपूर्ण ढंग से सामना करने की प्रेरणा प्राप्त करता है। उन्होंने श्रद्धालुओं को जीवन में आध्यात्मिक चिंतन और सदाचार को अपनाने का संदेश दिया। वहीं, आयोजक राम कुमार उपाध्याय ने प्रकृति के प्रति मानवीय जिम्मेदारी पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि यदि मनुष्य प्रकृति के प्रकोप से बचना और उसकी शीतल छाया में सुख-समृद्धि का जीवन जीना चाहता है, तो उसे प्रकृति की ओर लौटना होगा। प्रकृति का सम्मान करने के साथ ही मनुष्य को अपनी जीवनशैली प्रकृति के अनुकूल बनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रकृति के साथ संतुलन स्थापित करना मानव जीवन और संपूर्ण जगत के कल्याण के लिए आवश्यक है। कार्यक्रम के अंतिम दिन 19 अक्टूबर को यज्ञ-हवन कर पूर्णाहुति की गई इसके साथ प्रसाद वितरण कर सभी श्रद्धालुओं एवं कथावाचक की टोली का विदाई किया गया। टोली नायक ने विदाई गीत प्रस्तुत करते हुए माहौल को भावनात्मक बना दिया। सभी ने अश्रुपूरित भाव से टोली की विदाई की। इस मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया। सभी लोगों की विदाई के साथ सात दिवसीय धार्मिक आयोजन संपन्न हुआ। कार्यक्रम को सफल बनाने में आचार्य नितिन कुमार तिवारी, कृष्ण कुमार उपाध्याय, रितु उपाध्याय,लव,उत्कर्ष, शाश्वत, अदिति, अनन्या, आलोक उपाध्याय, संजय उपाध्याय, सूरज, सुभाष उपाध्याय, हृदय नारायण उपाध्याय, तेज नारायण उपाध्याय,कमला उपाध्याय, सहित अन्य लोगों का सराहनीय सहयोग रहा।

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