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नाग पंचमी के पर्व पर महिलाओं ने की नाग देवता की पूजा, मांगी भाई की सुख-समृद्धि

एम.खालिद

गाजीपुर। श्रावण मास का पहला प्रमुख पर्व नाग पंचमी आज श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। श्रावण शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व को सनातन परंपरा में विशेष महत्व प्राप्त है। नाग पंचमी के अवसर पर महिलाएं व्रत रखकर नाग देवता की पूजा-अर्चना करती हैं तथा अपने भाइयों के सुख, स्वास्थ्य, दीर्घायु और सफलता की कामना करती हैं। इस दौरान महिलाएं नए वस्त्र एवं आभूषण धारण कर विधि-विधान से पूजा करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा करने से सर्प भय से मुक्ति मिलती है और परिवार पर नाग देवता की कृपा बनी रहती है। श्रद्धालु इस दिन नाग देवता को दूध, पुष्प और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर सुख-शांति की कामना करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इस पर्व को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिलता है। नाग पंचमी के संबंध में प्रचलित धार्मिक कथा के अनुसार राजा जनमेजय ने सर्पयज्ञ का आयोजन किया था। इसी दौरान आस्तिक ऋषि ने राजा को प्रसन्न कर उनसे वरदान मांगने का अवसर प्राप्त किया। आस्तिक ऋषि ने सर्पयज्ञ रोकने का अनुरोध किया, जिसे राजा जनमेजय ने स्वीकार कर लिया। मान्यता है कि जिस दिन यह सर्पयज्ञ रोका गया, वह श्रावण शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि थी। इसी कारण इस दिन नाग देवता की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। नाग पंचमी से भगवान श्रीकृष्ण और कालिया नाग की कथा भी जुड़ी हुई है। धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रावण शुक्ल पक्ष की पंचमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण ने विषैले नाग कालिया और उसके परिवार को पवित्र यमुना नदी छोड़ने के लिए बाध्य किया था। इसके बाद यमुना का जल जनजीवन के लिए सुरक्षित हुआ। इसी प्रसंग के कारण भी नाग पंचमी को नाग पूजा का महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। एक अन्य लोककथा के अनुसार प्राचीन काल में सत्येश्वरी नाम की एक देवी थीं। उनके भाई सत्येश्वर की नाग पंचमी की पूर्व संध्या पर मृत्यु हो गई थी। भाई की मृत्यु से दुखी सत्येश्वरी ने नाग पंचमी के दिन अपने भाई को नाग के रूप में देखा। उन्हें विश्वास हुआ कि नाग ही उनके भाई हैं। मान्यता है कि उस समय नाग देवता ने सत्येश्वरी को वचन दिया कि जो महिलाएं उन्हें अपना भाई मानकर श्रद्धा से पूजा करेंगी, उनकी और उनके भाइयों की रक्षा की जाएगी। इसी धार्मिक मान्यता के चलते नाग पंचमी पर महिलाएं नाग देवता की पूजा कर अपने भाइयों की सुख-समृद्धि और दीर्घायु की कामना करती हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि आस्था और विधि-विधान से की गई पूजा से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

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