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लखनऊ: मंत्री और अधिकारी ही बने सीएम योगी के सरदर्द

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार अपना साल भर का कार्यकाल पूरा करने जा रही है। इस साल भर में प्रदेश सरकार को कई बार अपने ही मंत्रियों और अफसरों से परेशानी का सामना करना पड़ा है। योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री ने रैली में खुलेआम सरकार पर भ्रष्‍टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि योगी सरकार में भ्रष्‍टाचार चरम पर है, जो काम पहले थाने में पांच सौ रूपये में होता था अब वह पांच हजार देने पर होता है। सीएम योगी और डिप्‍टी सीएम केशव मौर्य के बीच तल्‍खी की खबरे रोजाना राजनीतिक गलियारो में चर्चा आम रहती है। कहीं डीएम साहेब फेसबुक पर सरकार के खिलाफ ही विवादित टिप्पणी करते दिखे, तो कहीं आईपीएस अफसर का वीडियो सरकार की किरकिरी का कारण बना.  कासगंज मामले से लेकर मेरठ में मां बेटे की जघन्‍य हत्‍या  हो या फिर बीयर शॉपर का उद्घाटन से लेकर डीएम और थानाध्यक्ष में तू-तू मैं-मैं. कई जगह सरकारी मशीनरी के तार कसने में योगी सरकार को खासी मशक्कत का सामना करना पड़ा। बरेली के डीएम  राघवेंद्र विक्रम सिंह ने कासगंज हिंसा को लेकर फेसबुक पर विवादित टिप्पणी कर दी, जिसके बाद बखेड़ा खड़ा हो गया. जिलाधिकारी ने लिखा कि ‘अजब रिवाज बन गया है। मुस्लिम मोहल्लों में जबरदस्ती जुलूस ले जाओ और पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाओ. क्यों भाई वे पाकिस्तानी हैं क्या? यही यहां बरेली के खेलम में हुआ था. फिर पथराव हुआ, मुकदमे लिखे गए। मामले में बीजेपी विधायक ने डीएम को जेल भेजने की मांग कर डाली. वहीं बीजेपी संगठन की तरफ से भी इस पर विरोध दर्ज कराया गया. मामला इतना बढ़ा कि सीएम दरबार तक पहुंच गया। डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने भी डीएम की टिप्पणी को गलत बताया. इसके बाद डीएम बरेली ने खुद फेसबुक पर सफाई देते हुए माफी मांगी। अभी डीएम का मामला थमा नहीं था कि सहारनपुर के सांख्यिकी विभाग की डिप्टी डायरेक्टर रश्मि वरूण ने अपनी फेसबुक पोस्ट में विवादित टिप्पणी कर दी. उन्होंने लिखा कि चंदन गुप्ता को खुद भगवा ने मारा है. इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर एक नया तूफान खड़ा हो गया. बाद में वह खुद ही बैकपुट पर आ गईं और पोस्ट के लिए माफी मांगी। इसके बाद प्रदेश के पुलिस महानिदेशक होमगार्ड सूर्य कुमार शुक्‍ल का एक वीडियो वायरल हुआ. इसमें वह राम मंदिर निर्माण को लेकर कसम खाते नजर आए. इस वीडियो ने प्रदेश में एक बार भी भूचाल ला दिया. मामले में सोशल मीडिया से लेकर सत्ता के ग​लियारों में सूर्य कुमार शुक्ला पर खूब हमले हुए। मामले मे उत्तर प्रदेश शासन ने सूर्य कुमार शुक्ला से जवाब तलब कर लिया. गृह विभाग की तरफ से उनसे विवादित बयान को लेकर जवाब मांगा गया है। खुद डीजी होमगार्ड कहते हैं कि मुस्लिम समुदाय के कार्यक्रम में गया था. किसी ने शरारत की है. वीडियो ऐसे चलाया जा रहा है जैसे ज़ोर ज़बरदस्ती से राम मंदिर निर्माण की बात कही जा रही है. शांति व्यवस्था के साथ राम मंदिर निर्माण की बात हो रही थी. शांतिपूर्ण ढंग से विवाद के निपटारे की बात हो रही थी। मेरठ में पिछले दिनों मां-बेटे की नृशंस हत्या का मामला सामने आया. बेटे की गोली मारकर हत्या करने के बाद बदमाश खाट पर लेटी वृद्ध महिला पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा देते है. इस घटना का लाइव वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. इस पर वुमेन पावरलाइन के आईजी नवनीत सिकेरा ने इस वीडियो को अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर किया और सवाल किया कि अब और सबूत की क्या जरूरत है. नवनीत सिकेरा का ये ट्वीट तेजी से सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बन गया. इसके बाद नवनीत सिकेरा ने अपना ये ट्वीट हटा दिया। कौशाम्बी में अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ बीके सिंह के एक पत्र ने शासन स्तर पर हड़कंप मचा दिया. कौशाम्बी डीएम को लिखे इस पत्र में सामान्य परिस्थितियों में देर रात मीटिंग नहीं बुलाए जाने की गुहार लगाई गई है. कहा गया कि इससे 50 की उम्र पार कर चुके उन जैसे अफसरों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. हमारा कार्य ज्ञान, अनुभ्व नए अधिकारियों से अधिक होता है. इसी कारण सरकार हमें 1.5 से 2 लाख रुपए प्रतिमाह वेतन देती है. लेकिन शारीरिक शक्ति 24 से 30 वर्ष के युवकों की तुलना में कम हो जाना प्राकृतिक कारणों से स्वाभाविक है। इस उम्र में काफी व्यक्ति मधुमेह व उच्च रक्तचाप से प्रभावित होते हैं। इनके लिए समय से उचित भोजन, कार्य और आराम आवश्यक होता है। कुशीनगर में थानाध्यक्ष पटहेरवा ने कथित दुव्र्यवहार का आरोप लगाते हुए थाने की जीडी में डीएम के खिलाफ असंसदीय भाषा का प्रयोग करने का तस्करा दर्ज किया। मामले में डीएम की शिकायत पर एसपी ने थानाध्यक्ष को लाइन हाजिर कर दिया। आरोप है कि डीएम ने 27 जनवरी को थानाध्यक्ष को बुलाया था। यहां किसी बात को लेकर दोनों के बीच बहस हो गई. थानाध्यक्ष ने अपने जीडी में डीएम के बारे में लिखा कि उन्होंने असंसदीय भाषा का प्रयोग किया। उधर डीएम ने कई मामलों लापरवाही का आरोप लगाते हुए थानाध्यक्ष के खिलाफ शिकायत की, जिस पर एसपी ने थानाध्यक्ष को लाइन हाजिर कर दिया। इस मामले में सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हुई, खुद बीजेपी प्रवक्ता इस मामले में डीएम के खिलाफ टिप्पणी करते नजर आए। बाराबंकी में बीजेपी की सांसद प्रियंका सिंह रावत ने जिलाधिकारी अखिलेश तिवारी पर भ्रष्टाचार विकास कार्यों की अनदेखी और खुद के अभिमान का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने इस संबंध में बाकायदा एक पत्र लिखकर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जिलाधिकारी अखिलेश तिवारी की शिकायत की।

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