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जीवन की अंतिम सांसें गिन रहे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ने पीएम से मिलने की जताई अंतिम इच्छा

गाजीपुर। देश में ऐसे गिनती के लोग ही बचे होंगे जिन्होंने राष्ट्रीय आंदोलन से जुड़कर देश को आजाद कराने के लिए सड़क से जेल तक की यात्रा किया हो। ऐसे ही खुशनसीब लोगों में गाजीपुर जनपद के शेरपुर गांव निवासी 102 वर्षीय कालिका उपाध्याय भी हैं। वैसे तो गाजीपुर में 13 सौ से अधिक संख्या स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की थी किंतु अब केवल कालिका उपाध्याय ही उन सेनानियों में अभी तक जिंदा है।  बुधवार को समग्र विकास इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष ब्रजभूषण दूबे अपने सहयोगियों सहित शेरपुर गांव जाकर स्वाधीनता संग्राम सेनानी उपाध्याय जी से मुलाकात किया और उनकी अंतिम इच्छा प्रधानमंत्री से मिलने की जानकर यह मार्मिक सन्देश पीएमओ पोर्टल के माध्यम से प्रधानमंत्री जी तक पहुंचाया।  16 वर्ष की उम्र मे ही गांधी जी के नमक सत्याग्रह मे कूद पड़े थे कालिका उपाध्याय 9 जनवरी 1916 को गृह ग्राम शेरपुर में चंद्रधर उपाध्याय के इकलौते पुत्र के रूप में पैदा हुए कालिका उपाध्याय ने राजकीय सिटी इंटर कालेज गाजीपुर में सातवीं कक्षा की पढ़ाई करते हुए नमक सत्याग्रह मे कूद पड़े थे। गाजीपुर में ही सत्याग्रह का जुलूस निकालते हुए 16 मार्च 1932 को पुलिस ने उन सहित अन्य दो को गिरफ्तार गिरफ्तार किया जिसमें उन्हें 4 महीने 9 दिन की जेल यात्रा गाजीपुर  के जिला कारागार में काटनी पड़ी थी। किशोर कालिका को  अंग्रेज सिपाहियों के कोड़े भी खाने पड़े थे।  उच्च शिक्षा प्राप्त कालिका उपाध्याय सुभाष बाबू के गरम दल में हुए थे शामिल महात्मा गांधी के आंदोलनों से प्रभावित हो कालिका उपाध्याय स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े थे किंतु बाद में सुभाष बाबू के गरम दल में शामिल होकर भारत को आजाद कराने की गतिविधियों में सक्रिय रुप से भागीदारी करने लगे।  गाजीपुर की जेल यात्रा के बाद उन्होंने बलिया से हाई स्कूल, बिहार व पश्चिम बंगाल से उन्होंने अंग्रेजी से मास्टर डिग्री तक की शिक्षा पूरी की। कई वर्षों तक भूमिगत और होकर उन्होंने आजादी के पर्चे बांटने, जन जागरण करने व देश को आजाद कराने के जन आंदोलनों में प्रतिभाग किया। 100 किलोग्राम भार वर्ग के पहलवान तथा नेशनल तैराक भी रह चुके हैं कालिका उपाध्याय।  आजादी मिलने के बाद कांग्रेस से असंतुष्ट हो जनसंघ से लड़ा था विधानसभा का चुनाव आजादी के बाद कालिका उपाध्याय कांग्रेस की नीतियों से असंतुष्ट हो  जन संघ के बैनर तले  पश्चिम बंगाल 24 परगना  के कवि तीर्थ विधानसभा से  1968 में विधानसभा का चुनाव भी लड़ा था। समग्र विकास इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष ब्रजभूषण दूबे  से स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कालिका उपाध्याय ने अपनी अंतिम इच्छा प्रधानमंत्री से मुलाकात करने की बताया। उन्होंने कहा अंतिम सांसे गिन रहा हूं एक बार प्रधानमंत्री जी के दर्शन हो जाए। एक अदद शौचालय तक नही मिला सरकार से   केंद्र व प्रदेश सरकार ने स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े हुए परिवारों को पेट्रोल पंप गैस एजेंसी व अन्य सुविधाएं प्रदान कराया किंतु कालिका उपाध्याय के लिए आवास अन्य सुविधाएं देना तो दूर एक अदद शौचालय भी नहीं बना।  प्रदेश सरकार से मिलने  वाली 12 हजार रुपए की पेंशन का अधिकांश हिस्सा उनके दवा में ही खर्च हो जाता है।  उपाध्याय जी के इकलौते पौत्र कौशलेश उपाध्याय ने कहा कि केंद्र व प्रदेश सरकार के अलावा स्थानीय जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों तक उन्होंने लिखा पढ़ी कर अपनी सिफारिश पहुंचाया किंतु किसी भी प्रकार की मौलिक व जीविकोपार्जन की सुविधाएं  उन्हें प्राप्त नहीं कराई गई। प्रदेश सरकार से उन्हें राजनैतिक पेंशन जरूर मिलती है किंतु केंद्र की पेंशन अभी तक अधर में लटकी हुई है जिसके लिए उन्होंने उच्च न्यायालय में याचिका योजित कर रखा है। अपने  पुराने कच्चे मकान व झोपड़ी में ही कालिका उपाध्याय अपने पोते वह उनके बच्चों के साथ रहते हैं। उक्त अवसर पर ब्रजभूषण दुबे के साथ किसान पुत्र नीरज राय, अजय यादव, तुंगनाथ राय, बुच्चू बाबा, पिंटू, शिब्बू राय, प्रिंस राय, जेपी, मन्नू राय, रोशन यादव आदि लोग उपस्थित थे।

 

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